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सियासी संग्राम में भाजपा के योद्धा: हाईकमान ने इन चेहरों पर लगाया दांव, ये बातें भी जान लीजिए
Wed, 27 Mar 2019 02:11 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 27 Mar 2019 02:11 PM IST
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फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहीं हैं। वहीं बीजेपी ने कई दिग्गज नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कानपुर, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, हमीरपुर-महोबा, जालौन, अकबरपुर, इटावा, कन्नौज के भाजपा प्रत्याशियों के बारे में...
सत्यदेव पचौरी (फाइल फोटो)
कानपुर, सत्यदेव पचौरी
गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सत्यदेव पचौरी ने 1972 में वीएसएसडी कॉलेज छात्रसंघ कानपुर अध्यक्ष के रूप में विद्यार्थी परिषद का चुनाव लड़ा। 1968 से 1975 तक भारतीय जनसंघ में सक्रिय भूमिका में रहे। 1975 से 1977 तक लोकनायक जयप्रकाश आंदोलन से जुड़े रहे। 1978 से भाजयुमो में पदाधिकारी रहे। 1980 में भाजपा उप्र कार्य समिति के सदस्य रहे।
1991 में पहली बार आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए, इसी वर्ष विधानमंडल के कोषाध्यक्ष बनाए गए। 1991 से 2002 तक लोहा व्यापार मंडल कानपुर के अध्यक्ष रहे।
1992 में यूपी भाजपा के प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष बने। 1993 में सपा के हाजी मुश्ताक सोलंकी से हारे थे आर्यनगर का चुनाव। 1994 से 2004 तक भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रहे।
2004 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा महानगर क्षेत्र से चुनाव लड़े। 2012 में गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक निर्वाचित। 2017 में गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक चुने गए।2017 की प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं।
गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सत्यदेव पचौरी ने 1972 में वीएसएसडी कॉलेज छात्रसंघ कानपुर अध्यक्ष के रूप में विद्यार्थी परिषद का चुनाव लड़ा। 1968 से 1975 तक भारतीय जनसंघ में सक्रिय भूमिका में रहे। 1975 से 1977 तक लोकनायक जयप्रकाश आंदोलन से जुड़े रहे। 1978 से भाजयुमो में पदाधिकारी रहे। 1980 में भाजपा उप्र कार्य समिति के सदस्य रहे।
1991 में पहली बार आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए, इसी वर्ष विधानमंडल के कोषाध्यक्ष बनाए गए। 1991 से 2002 तक लोहा व्यापार मंडल कानपुर के अध्यक्ष रहे।
1992 में यूपी भाजपा के प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष बने। 1993 में सपा के हाजी मुश्ताक सोलंकी से हारे थे आर्यनगर का चुनाव। 1994 से 2004 तक भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रहे।
2004 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा महानगर क्षेत्र से चुनाव लड़े। 2012 में गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक निर्वाचित। 2017 में गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक चुने गए।2017 की प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं।
देवेंद्र सिंह भोले (फाइल फोटो)
अकबरपुर, देवेंद्र सिंह भोले
देवेंद्र सिंह भोले ने 2014 में पहली बार अकबरपुर क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए। 1993 और 1996 में दो बार विधानसभा का चुनाव डेरापुर क्षेत्र से लड़े और जीते। एक बार सिंकदरा और दो बार डेरापुर से विधायकी का चुनाव हार चुके हैं। एक बार ब्लाक प्रमुख भी रह चुके हैं।
देवेंद्र सिंह भोले ने 2014 में पहली बार अकबरपुर क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए। 1993 और 1996 में दो बार विधानसभा का चुनाव डेरापुर क्षेत्र से लड़े और जीते। एक बार सिंकदरा और दो बार डेरापुर से विधायकी का चुनाव हार चुके हैं। एक बार ब्लाक प्रमुख भी रह चुके हैं।
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मुकेश राजपूत (फाइल फोटो)
फर्रुखाबाद: मुकेश राजपूत (सांसद)
सांसद मुकेश राजपूत वर्ष 2000 से 2005 तक खुद और 2006 से 2012 तक इनकी पत्नी सौभाग्यवती राजपूत जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। मुकेश ने एक बार पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पार्टी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से भी लोकसभा का चुनाव लड़ा है। 2014 में मुकेश राजपूत फर्रुखाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। एक सितंबर 2014 को उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के तहत परामर्श समिति का सदस्य भी चुना गया। उनका जन्म 8 अगस्त 1968 को फर्रुखाबाद में हुआ और स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की। उनका खेती मुख्य पेशा है। उनके तीन बेटे व एक बेटी हैं और वह फर्रुखाबाद में ठंडी सड़क पर रहते हैं।
सांसद मुकेश राजपूत वर्ष 2000 से 2005 तक खुद और 2006 से 2012 तक इनकी पत्नी सौभाग्यवती राजपूत जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। मुकेश ने एक बार पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पार्टी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से भी लोकसभा का चुनाव लड़ा है। 2014 में मुकेश राजपूत फर्रुखाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। एक सितंबर 2014 को उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के तहत परामर्श समिति का सदस्य भी चुना गया। उनका जन्म 8 अगस्त 1968 को फर्रुखाबाद में हुआ और स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की। उनका खेती मुख्य पेशा है। उनके तीन बेटे व एक बेटी हैं और वह फर्रुखाबाद में ठंडी सड़क पर रहते हैं।
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साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
फतेहपुर: साध्वी निरंजन ज्योति (सांसद)
कथावाचक से केंद्रीय मंत्री तक का सफर पूरा करने वाली साध्वी अब निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर भी हैं। निषाद बिरादरी से ताल्लुक रखने वाली निरंजन का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की पतिउरा गांव के मजरा मलिहाताला में हुआ था। बारहवीं तक पढ़ी निरंजन ने 21 साल की उम्र में स्वामी अच्युतानंद से गुरुदीक्षा लेकर सन्यास लिया था। विहिप में केंद्रीय सहमंत्री रही यूपी में भगवा ब्रिगेड का चेहरा मानी जाती हैं। दुर्गा वाहिनी, विहिप से होते हुए बीजेपी में सक्रिय हुईं निरंजन की छवि तेज तर्रार व बेबाक नेता की रही है। गेरुआ वस्त्र पहनती हैं और विशेष शैली में प्रवचन भी देती हैं। 2002 में बीजेपी से विधानसभा का चुनाव लड़ीं, मगर हार गईं। 2007 में फिर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2012 के चुनाव में हमीरपुर सदर सीट से विधायक बनीं। वर्ष 2014 में लोकसभा में बीजेपी ने फतेहपुर से इन्हें अपना चेहरा बनाया। पहली बार में ही सांसद बन गईं।
कथावाचक से केंद्रीय मंत्री तक का सफर पूरा करने वाली साध्वी अब निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर भी हैं। निषाद बिरादरी से ताल्लुक रखने वाली निरंजन का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की पतिउरा गांव के मजरा मलिहाताला में हुआ था। बारहवीं तक पढ़ी निरंजन ने 21 साल की उम्र में स्वामी अच्युतानंद से गुरुदीक्षा लेकर सन्यास लिया था। विहिप में केंद्रीय सहमंत्री रही यूपी में भगवा ब्रिगेड का चेहरा मानी जाती हैं। दुर्गा वाहिनी, विहिप से होते हुए बीजेपी में सक्रिय हुईं निरंजन की छवि तेज तर्रार व बेबाक नेता की रही है। गेरुआ वस्त्र पहनती हैं और विशेष शैली में प्रवचन भी देती हैं। 2002 में बीजेपी से विधानसभा का चुनाव लड़ीं, मगर हार गईं। 2007 में फिर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2012 के चुनाव में हमीरपुर सदर सीट से विधायक बनीं। वर्ष 2014 में लोकसभा में बीजेपी ने फतेहपुर से इन्हें अपना चेहरा बनाया। पहली बार में ही सांसद बन गईं।