लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि मकर संक्रांति आने के साथ मौसम थोड़ा गुनगुना होना शुरू हो जाएगा। शनिवार सुबह धूप खिली भी मगर दोपहर बाद 3:30 बजे से शुरू हुए बर्फीली हवाओं के सिलसिले ने उम्मीदों को ठंडा कर दिया। रही सही कसर अगले चार दिनों तक हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ने के मौसम विभाग के आकलन ने पूरी कर दी।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिन तेज बर्फीली हवाएं चल सकती हैं। इससे दिन के तापमान में आठ से 10 डिग्री सेल्सियस और रात के तापमान में पांच डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। शनिवार सुबह से लेकर दोपहर तक अच्छी धूप खिली रही। फिर मौसम ऐसा बदला की सिर्फ ढाई घंटे में तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस का गोता लगा गया।
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कानपुर में ठंड का कहर
- फोटो : अमर उजाला
शाम छह बजे तापमान 17 डिग्री पर आ गया, जबकि 3:30 बजे यह 23.4 डिग्री सेल्सियस पर था। शनिवार को अधिकतम तापमान एक डिग्री की गिरावट के साथ 23.4 दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री घटकर 8.2 पर आ गया।
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कानपुर में ठंड का कहर
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मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों में प्रदेश से जुड़े पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बर्फबारी होने और मैदानी इलाकों में बर्फीली हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार 18 जनवरी के बाद फिर से पश्चिमी विक्षोभ का असर बढ़ने से तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है।
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तापमान का उतार-चढ़ाव सेहत के लिए खतरा
तापमान का उतार-चढ़ाव लोगों की सेहत के लिए खतरा है। तापमान घटने-बढ़ने से वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ते हैं। इसके साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोक्षक क्षमता पर भी असर आता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि तापमान के अचानक बढ़ने या घटने पर शरीर तुरंत अपने को समायोजित नहीं कर पाता है।
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कानपुर में ठंड का कहर
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इसका शरीर के मेटाबोल्जिम पर असर आता है। इससे ब्लड प्रेशर अनियमित हो जाता है। इससे शरीर में खून का थक्का जम सकता है। इसके साथ ही रेनॉल्ड डिजीज की भी दिक्कत हो सकती है। सीनियर फिजीशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि तापमान के उतार-चढ़ाव से वायरल संक्रमण बढ़ता है। इससे जुकाम, खांसी, निमोनिया आदि की दिक्कत बढ़ने लगती है।