कानपुर जिले में हुए बिकरू कांड में दहशतगर्द विकास दुबे और उसके गुर्गे इतने खूंखार क्यों हो गए कि आठ पुलिसवालों को मार डाला। ये सवाल हर किसी के लिए पहले बना हुआ है। पुलिस समझ ही नहीं पा रही है कि आखिर पुलिस के साथ इतनी बर्बरता क्यों की गई। विकास के पकड़े जाने के बाद ही इसका जवाब मिल सकेगा।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
विकास पर 71 केस दर्ज हैं। वह कई बार जेल भी जा चुका है। इसलिए सवाल है कि हत्या के प्रयास के मुकदमे में उसको पकड़े जाने का डर क्यों था, जो इस तरह से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिस अफसर जांच के दौरान इस सबसे बड़े सवाल का जवाब खंगाल रह हैं।
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दूसरी तरफ कई चर्चाएं भी हो रही हैं। एक चर्चा ये भी है कि विकास दुबे के पास करोड़ों की नकदी और जेवरात थे। उसको वह ठिकाने लगाने का इंतजाम कर रहा था, तभी पुलिस के आने की सूचना मिली। यही वजह है कि उसने भागने के बजाए मोर्चा लेने की ठीन ली और वारदात को अंजाम दिया।
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एक चर्चा ये भी है कि विकास को अंदेशा था कि पुलिस उसका एनकाउंटर कर देगी, इसलिए उसने हमला कर दिया। पुलिस अफसरों का कहना अमूमन बदमाश पुलिस को देखकर फरार हो जाते हैं। कभी-कभी फंसता देख एक आध फायर कर देते हैं मगर इस घटना में साफ है कि वो पुलिस पर धावा बोलने का इरादा बना ही चुका था।
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हथेली पर लिखा नंबर बना पहेली
शहीद हुए एक पुलिसकर्मी की हथेली पर एक कार का नंबर लिखा हुआ है। आशंका है कि ये वो नंबर है जिसे उसने घायल होने के बाद देखा होगा। शायद जिस गाड़ी से बदमाश भागे हों, ये उसी का नंबर हो। पुलिस ने इसे जांच में शामिल किया है।