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कानपुर एनकाउंटर: रिचा को लेकर एक और खुलासा, बसपा में रहकर विकास ने खरीद ली थी सपा की सक्रिय सदस्यता
Thu, 09 Jul 2020 02:25 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 09 Jul 2020 02:25 AM IST
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vikas dubey news
- फोटो : amar ujala
कानपुर एनकाउंटर के बाद विकास दुबे और उसकी सपा नेता पत्नी रिचा सुर्खियों में है। घटना के बाद से विकास और सपा सहित सभी दलों के नेताओं के साथ उसकी फोटो वायरल हो रही है। इस सब के बीच विकास और रिचा को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। चौबेपुर के बिकरू गांव में 14 साल तक (1995 से) प्रधान रहने और फिर जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद शातिर अपराधी विकास दुबे को राजनेता बनने की लत लग गई।
सरला दुबे, विकास की मां
- फोटो : amar ujala
यही वजह रही कि जब उसे शिकस्त मिली तो ठीक अगले चुनाव 2014 में उसने अपनी पत्नी रिचा दुबे को घिमऊ सीट से जिला पंचायत के चुनाव में उतार दिया। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। बसपा में होने के बावजूद विकास ने ऐसा सिक्का जमाया कि पत्नी को सपा की सक्रिय सदस्यता दिला दी और सपा के जिला पंचायत प्रत्याशी बनाए जा रहे रामकरण यादव के सामने दूसरे सपा प्रत्याशी के रूप में चुनौती पेश कर दी। सक्रिय सदस्य बनाने के लिए न तो विकास दुबे कभी सपा की नगर ग्रामीण इकाई के कार्यालय गया न ही उसकी पत्नी।
विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
उसने पार्टी के ही कुछ लोगों से सक्रिय सदस्यता की एक रसीद पूरी फीस जमा करके खरीद ली थी। उसी से उसने अपनी पत्नी को सपा का सक्रिय सदस्य बनवाया। इस रसीद के आधार पर उसने और भी लोगों को सक्रिय सदस्य के रूप में जोड़ा और अपने साथ मिला लिया। मजे की बात यह है कि रिचा दुबे को सक्रिय सदस्य बनाने के संबंध में पार्टी के तत्कालीन जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव को भी जानकारी नहीं हुई।
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विकास दुबे एवं पत्नी रिचा दुबे
- फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि विकास दुबे और उसकी पत्नी को पार्टी का सक्रिय सदस्य बनाने के लिए उनकी तरफ से कोई पत्र नहीं दिया गया। अध्यक्ष का कहना है कि हो सकता है कि सक्रिय सदस्य को लेकर जो रसीदें उस समय बांटी गई थी, उसे विकास दुबे या उसकी पत्नी ने किसी माध्यम से ले लिया हो और सदस्य बन गए हों।
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एडीजी एलओ और विकास दुबे एवं हमले में शहीद पुलिसकर्मी
- फोटो : amar ujala
इस बीच जब जिला पंचायत चुनाव में नामांकन का समय आया तो अधिकृत प्रत्याशी को लेकर पार्टी जिलाध्यक्ष के साथ लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि जिला पंचायत की सीट पर जहां दो लोग पार्टी से आमने-सामने है, वहां पार्टी अपना अधिकृत प्रत्याशी नहीं घोषित करेगी। जीतने वाले को पार्टी के टिकट पर जीता माना जाएगा। रिचा दुबे ने सपा के ही रामकरण यादव को हराकर इस सीट पर विजय हासिल की थी। उसके बाद से वह सपा की तरफ से अधिकृत कर दी गईं।