कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में निर्दोष होने के बावजूद जेल भेजी गई शालू जल्द ही जेल से आजाद हो सकती है। पुलिस की ओर से कोर्ट में शालू को निर्दोष बताते हुए नौ पन्नों की क्लोजर रिपोर्ट पेश की है। पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट में चार प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाया है।
सीपी रघुबीर लाल ने बताया कि जांच में स्पष्ट हुआ कि शालू ने रतन ऑर्बिट के सुरक्षाकर्मी से विशाल को शुभम बताते हुए कहा था कि उसे अंदर जाने देना। इसके लिए सुब्रत ने ही शालू को यह कहकर मनाया था कि पिता विनीत विशाल से नाराज रहते हैं।
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हत्या के बाद फ्लैट में जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उसके फ्लैट पर आने की जानकारी से वो गुस्सा होंगे। विशाल की एंट्री से पहले फ्लैट के सीसी कैमरे सुब्रत ने ही बंद किए थे। फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी विशाल ने ही बनवाई थी। उसने दुकानदार को 100 रुपये भी दिए थे। शालू को इस बात की जानकारी नहीं थी।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी बहू
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शालू और विशाल से अलग-अलग पूछताछ हुई। हालांकि दोनों ने जो बयान दिए वह मैच हुए। शालू ने बताया कि चार सितंबर को उसने विशाल से जन्माष्टमी का सामान मंगाने के लिए फोन किया था। विशाल ने भी यही बयान दोहराए थे। सुब्रत के खिलाफ मिले साक्ष्यों को भी क्लोजर रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
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आरोपी विशाल गौतम
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100 रुपये देकर लारेब से बनवाई थी चाबी
सुब्रत और विशाल शुरुआत में पुलिस को गुमराह कर रहे थे कि चाबी गुमटी में शालू ने बनवाई थी। हालांकि, पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान साफ हुआ कि 80 फीट रोड पर बनारसी चाय वाले के बगल में स्थित गैराज के सामने लारेब से चाबी बनवाई गई थी।
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कानपुर में दवा कारोबारी का कत्ल, मौके पर पहुंची पुलिस
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इसके लिए सुब्रत ने 100 रुपये दिए थे। पुलिस ने जब लारेब को फोटो दिखाई तो उसने भी इस बात की पुष्टि की है। उस दौरान गाड़ी में शालू मौजूद थी। हालांकि सुब्रत ने उसे कहा था कि एक दुकान के ताले की चाबी खो गई है वही बनवानी है।