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सचेंडी हादसा: लाल्हेपुर की आंखें लाल, बस आंसू और चीत्कार, बगीचे में रखी गईं अर्थियों के चारों ओर जुटे सैकड़ों ग्रामीण
Thu, 10 Jun 2021 10:49 AM IST
शिखा पांडेय
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 10 Jun 2021 10:49 AM IST
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कानपुर हादसा: गमगीन बैठे परिजन
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर की ओर से जाते समय सचेंडी किसान नगर नहर के पास से बाएं हाथ एक पक्का रास्ता जाता है। इस रास्ते पर करीब सात किलोमीटर चलने के बाद फिर एक टूटी-फूटी सड़क दाएं तरफ फूटती है। इस ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर करीब पांच किलोमीटर का सफर तय करने के बाद गांव आता है लाल्हेपुर। बिल्कुल रिंद नदी के किनारे बसा है यह गांव। ये वही गांव है, जहां के 14 लोगों ने सचेंडी हादसे में जान गंवाई है। इन दिनों भले ही रिंद नदी सूखी है लेकिन लाल्हेपुर के ग्रामीणों की आंखों से अश्रु धारा रुक नहीं रही है। पूरे गांव में तो अजीब सी शांति रही लेकिन गांव के पास बने एक बगीचे में गम और गुस्से की ज्वाला जल रही थी। दरअसल, पोस्टमार्टम के बाद सभी 14 शव इसी बगीचे में रखे गए थे। गांव के लगभग हर घर के दरवाजे पर कुुंडी चढ़ी थी। सैकड़ों लोग बगीचे में ही एकजुट थे।
कानपुर हादसा: गमगीन बैठे परिजन
- फोटो : अमर उजाला
कुछ अपने भाई, पिता, बेटे की मौत से बिलखते नजर आए तो कुछ अपने दोस्त, अपने पड़ोसी को हमेशा के लिए खो देने के गम में सिसक रहे थे। जैसे ही शव अंतिम संस्कार के लिए उठाए गए तो पूरे गांव में पसरी अनचाही शांति चीख पुकार से टूट गई।
कानपुर के सचेंडी में भीषण हादसा
- फोटो : अमर उजाला
कई घरों के नहीं जले चूल्हे, जानवरों को भी चारा देना भूले
लाल्हेपुर गांव में यादव, पासवान और कुछ घर ठाकुर बिरादरी के हैं। हादसे में जिन लोगों की मौत हुई उनमें सात लोग पासवान परिवार के, पांच यादव परिवार के और दो ठाकुर परिवार के थे। इस वजह से पूरा गांव हादसे की चपेट में है।
लाल्हेपुर गांव में यादव, पासवान और कुछ घर ठाकुर बिरादरी के हैं। हादसे में जिन लोगों की मौत हुई उनमें सात लोग पासवान परिवार के, पांच यादव परिवार के और दो ठाकुर परिवार के थे। इस वजह से पूरा गांव हादसे की चपेट में है।
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कानपुर दर्दनाक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
करीब 1700 की आबादी वाले इस गांव के अधिकांश घरों में बुधवार को चूल्हे तक नहीं जले। सुबह से लेकर शाम तक घरों के पुरुष भूखे प्यासे परिवार और रिश्तेदारों के शवों का अंतिम संस्कार कराने में लगे रहे। लोग अपने घरों में बंधे जानवरों को चारा पानी तक करना भूल गए।
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कानपुर दर्दनाक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
ईश्वरीगंज में भी मचा कोहराम
लाल्हेपुर से करीब तीन किलोमीटर पहले ईश्वरीगंज गांव है। हादसे में यहां के भी चार लोगों की मौत हुई है। सड़के के दाहिने तरफ दो शव कफन में लिपटे रखे थे। शवों को घेरकर बैठी महिलाओं का बिलखना किसी से देखा नहीं जा रहा था। दूर खड़े परिवार के पुरुष सदस्य कभी इधर मुंह घुमाकर आंसू पूछ लेते तो कभी उधर। यहां तक कई पुलिस वाले भी चुपचाप अपने आंसू पोंछते नजर आए। यहां से करीब 200 मीटर आगे रखे दो शवों से भी महिलाएं लिपटकर रोती नजर आईं।
लाल्हेपुर से करीब तीन किलोमीटर पहले ईश्वरीगंज गांव है। हादसे में यहां के भी चार लोगों की मौत हुई है। सड़के के दाहिने तरफ दो शव कफन में लिपटे रखे थे। शवों को घेरकर बैठी महिलाओं का बिलखना किसी से देखा नहीं जा रहा था। दूर खड़े परिवार के पुरुष सदस्य कभी इधर मुंह घुमाकर आंसू पूछ लेते तो कभी उधर। यहां तक कई पुलिस वाले भी चुपचाप अपने आंसू पोंछते नजर आए। यहां से करीब 200 मीटर आगे रखे दो शवों से भी महिलाएं लिपटकर रोती नजर आईं।