कन्नौज में हुए हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में देरी हुई तो अपनों को तलाशने के लिए मजदूरों के परिजन खुद ही मलबा हटाने लगे। मौके पर जिला प्रशासन पहुंचा तो वहां आम लोग और यात्री भी घायलों को निकालकर अस्पताल भेज रहे थे। इसके बाद नगर पालिका से 50 सफाई कर्मियों को बुलाकर मलबा हटाने का काम शुरु किया गया। इनके अप्रशिक्षित होने की वजह से मलबा हटाने में तेजी नहीं आ पाई। बाद में एक जेसीबी, एक क्रेन को भी बुलाया गया। इसके बाद मलबा हटाने में कुछ तेजी आई।
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- फोटो : amar ujala
मलबा हटाने में देरी होने पर गुस्साए लोगों ने जेसीबी पर पथराव कर दिया, पुलिस को बचाव करना पड़ा
जेसीबी और क्रेन की सहायता से मलबा हटाया जा रहा था, लेकिन सरियों के जाल की वजह से जेसीबी तेजी से कार्य नहीं कर पा रही थी। इसी के साथ नगर पालिका के सफाईकर्मी भी गीले कंकरीट के मलबे को तसलों में भरकर हटा रहे थे। मोटी सरिया काटने के लिए ग्राइंडर और कटर नहीं थे। इस वजह से राहत एवं बचाव कार्य में काफी देरी हो रही थी। इस पर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। इसी बीच कुछ आक्रोशित लोगों ने जेसीबी पर पत्थर भी मारा, जिससे उसका शीशा भी टूट गया।
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अमृत योजना में रेलवे की लापरवाही ने घोला विष
अमृत भारत योजना के तहत जिस रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट की तरह बनाने की परिकल्पना की गई थी। वह रेलवे के लचर प्रबंधन और इंजीनियरिंग की दक्षता की भेंट चढ़ गई। लिंटर डालते समय कंपनी और रेलवे के इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं थे। मकान बनाने वाले राज मिस्त्री और मजदूरों से काम करवाया जा रहा था। साथ ही शटरिंग में भी खामियां थीं जो हादसे की मुख्य वजह बनीं। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। रेलवे ने भी जांच कराने की बात कही है।
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रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट की तरह बनाने की थी योजना
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कन्नौज के रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट की तरह बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसके लिए 13.50 करोड़ रुपये की धनराशि से स्टेशन के पुराने भवन को गिराकर नई बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा था। पहले निर्माण की जिम्मेदारी बदायूं की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को दी गई थी, लेकिन कार्य की गुणवत्ता खराब होने पर ब्लैक लिस्टेड करते हुए हटा दिया गया था।
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शटरिंग का ठेका था बरेली के हनीफ के पास
इसके बाद रेलवे ने दूसरा टेंडर किया जिसमें देवरिया की आशुतोष इंटरप्राइजेज को ठेका दिया गया। इस कंपनी ने प्रतीक्षालय, बुकिंग हॉल व शौचालय का लेआउट तैयार कर 150 मीटर का स्ट्रक्चर खड़ा किया। शटरिंग का ठेका बरेली के मोहम्मद हनीफ को दिया गया था। बताया गया कि शटरिंग ठेकेदार ने पहली बार इतना बड़ा ठेका लिया था, जिसे हैवी कंस्ट्रक्शन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।