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कबरई बना क्रबगाह: ताक पर नियम-कानून, क्रशर का बना गढ़, कृषिभूमि को भी नहीं छोड़ा

Sun, 20 Sep 2020 02:05 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, महोबा
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, महोबा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 20 Sep 2020 02:05 PM IST
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Kabrai became Krabgah: no rule-of-law on, Kabrai became the stronghold of the crusher, did not even leave the agricultural land
कबरई बनी कब्रगाह - फोटो : amar ujala
अवैध खनन के साथ कबरई क्रशर का गढ़ बन गया है। हर 100-200 मीटर पर एक क्रशर लगा हुआ है। नियम-कानून को ताक पर क्रशर लगाए गए  हैं। पूरा कबरई क्रशरों से घिरा हुआ है। हर तरफ आसमान में पत्थरों की धूल (सिलिका डस्ट) उड़ रही है। लोगों को सांस लेना भी दूभर हो गया है। अवैध रूप से लगाए गए क्रशर दिन रात धड़ल्ले से चलते हैं।


 
Kabrai became Krabgah: no rule-of-law on, Kabrai became the stronghold of the crusher, did not even leave the agricultural land
कबरई बनी कब्रगाह - फोटो : amar ujala
पुलिस, प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों की आंखें बंद हैं या ये कहें कि सब कुछ देखते हुए भी खामोश हैं। इसका कारण है मोटी और एक मुश्त रकम हर महीने पहुंचना। रिश्वतखोरी चरम पर है। इसलिए कबरई समेत बुंदलेखंड के अन्य जिलों में अवैध खनन जोरों पर है और अवैध रूप से क्रशर भी चल रहे हैं। एनजीटी के मानकों को दर किनार करने वाले 200 क्रशरों को बंद करने का आदेश जारी हुआ है। उनमें से भी कई क्रशर चल रहे हैं।

 
Kabrai became Krabgah: no rule-of-law on, Kabrai became the stronghold of the crusher, did not even leave the agricultural land
कबरई बनी कब्रगाह - फोटो : amar ujala
हाइवे से सटे लगे हैं स्टोन  क्रशर
बुंदलेखंड के जिन जिलों में पहाड़ों का खनन हो रहा है वहां पर कुल 600 स्टोन क्रशर लगे हुए हैं। इसमें अकेले महोबा में ही तकरीबन 350 क्रशर लगे हैं। जिसमें कबरई में सबसे अधिक क्रशर हैं। नियमानुसार नेशनल हाइवे से 500 मीटर दूर क्रशर लगे होने चाहिए लेकिन हकीकत इससे इत्तेफाक नहीं रखती है। यहां नेशनल हाइवे से 50-50 दूर ही क्रशर लगे मिल जाएंगे। जिसे हाइवे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है लेकिन क्रशर कारोबारियों के सामने जिम्मेदार नतमस्तक हैं।

 
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Kabrai became Krabgah: no rule-of-law on, Kabrai became the stronghold of the crusher, did not even leave the agricultural land
कबरई बना कब्रगाह - फोटो : अमर उजाला
कृषि भूमि को भी नहीं छोड़ा
कबरई और उसके आसपास की खेती पहले खनन और अब क्रशर की निकलने वाली सिलिका डस्ट से तबाह हो चुकी है। वहीं डंपरों की आवाजही से भी खेती लगभग खत्म सी हो गई है। अगर नियम की बात करें तो कृषिभूमि से एक किमी की दूरी पर क्रशर लगाए जाने चाहिए। मगर इस नियम का धड़ल्ले से माखौल उड़ाया जा रहा है। किसानों की जमीन लेकर कारोबारियों ने क्रशर लगाए हैं। उनको एक मुश्त रकम दे दी जाती और क्रशर कारोबारी एक तरह से जमीन मालिक बन जाते हैं।

 
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Kabrai became Krabgah: no rule-of-law on, Kabrai became the stronghold of the crusher, did not even leave the agricultural land
छावनी बना महोबा - फोटो : amar ujala
आबादी और स्कूल भी जद में
नियमानुसार आबादी वाले इलाकों, स्कूल, हेरिटेज और वन क्षेत्र से एक किमी की दूरी पर क्रशर होने चाहिए। पर, कबरई में ऐसा नहीं है। गुगौरा चौकी पर स्थित प्राथमिक स्कूल के ठीक पीछे(तकरीबन डेढ़ सौ मीटर) क्रशर लगा हुआ है। हाइवे से भी वो इतनी ही दूरी पर है। ये हाल पूरी कबरई का है। जिधर नजर जाएगी उधर  क्रशर और आसमान में धूल ही धूल नजर आएगी।

 
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