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'तेरी यादें तो जलते हुए दीपक जैसी हैं, मुझे तो यह अंधेरे में रोने भी नहीं देती' सुन झूमे हरकोटियन्स
Thu, 28 Nov 2019 10:06 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 28 Nov 2019 10:06 PM IST
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एचबीटूयू का तीन दिवसीय टेक्नो कल्चरल फेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में गुरुवार से तीन दिवसीय टेक्नो कल्चरल फेस्ट अध्याय 19 का आगाज हो गया। इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने कई तरह के खेलों और प्रतियोगिताओं में भाग लेकर खूब मस्ती की। वहीं, हुनरमंदों ने नई तकनीक का प्रदर्शन भी किया।
तीन दिवसीय टेक्नो कल्चरल फेस्ट में छात्र छात्राओं ने की मस्ती
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, शाम को हुए कवि सम्मेलन में कवि अरुण जैमिनी समेत कई कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। फेस्ट की शुरुआत गली क्रिकेट और गली फुटबाल से हुई। इसमें संस्थान के छात्र-छात्राओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। दोपहर में ग्राउंड पर लगे ओपन माइक स्टेज में स्टूडेंट्स ने दिल खोलकर अपने भाव पेश किए।
तीन दिवसीय टेक्नो कल्चरल फेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
देर शाम ऑडिटोरियम में फेस्ट का उद्घाटन एचबीटीयू के कुलपति प्रो. एनबी सिंह ने दीप जलाकर किया। इस दौरान रजिस्ट्रार प्रो. मनोज शुक्ला, डीएसडब्ल्यू डॉ. रामनरेश, प्रो. रेखा बाली एवं स्टूडेंट कल्चरल कमेटी से आयुष कुमार, ध्रुव कौल, विशाल सिंह, स्वर्ण श्रीवास्तव, यशी राय, प्रतीक सिंह, आंजनेय बसेडिया एवं अभिनव त्रिपाठी मौजूद थे।
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टेक्नो कल्चरल फेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
स्टॉलों पर लगी रही भीड़
पहले दिन हॉबी प्रतियोगिताओं केस्टॉलों पर भीड़ रही। म्यूजिकल चेयर, सार्क रेस, एक्सप्रेसो, लिविंग ऑन द स्टेज जैसे कई प्रतियोगिताएं हुईं। वहीं, फोटोबूथ के स्टॉल पर स्टूडेंट्स नेे खूब मजा किया। इस बूथ पर रंगीन बाल, चश्मे एवं लिखे हुए बैनर के साथ छात्र-छात्राओं ने सेल्फी खिंचवाई।
पहले दिन हॉबी प्रतियोगिताओं केस्टॉलों पर भीड़ रही। म्यूजिकल चेयर, सार्क रेस, एक्सप्रेसो, लिविंग ऑन द स्टेज जैसे कई प्रतियोगिताएं हुईं। वहीं, फोटोबूथ के स्टॉल पर स्टूडेंट्स नेे खूब मजा किया। इस बूथ पर रंगीन बाल, चश्मे एवं लिखे हुए बैनर के साथ छात्र-छात्राओं ने सेल्फी खिंचवाई।
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कल्चरल फेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
कवियों ने रचनाओं से जीता दिल
तेरी यादें तो जलते हुए दीपक के जैसी हैं, मुझे तो यह अंधेरे में रोने भी नहीं देती...। कवि वाहिद अली वाहिद ने इन पंक्तियों से जोरदार तालियां बटोरीं। मौका था फेस्ट के पहले दिन शाम को आयोजित हुए कवि सम्मेलन का। देर शाम संस्थान के ऑडिटोरियम में जुटे देश के कोने-कोने से आए कवि अरुण जैमिनी, रामेंद्र मोहन त्रिपाठी, पद्मिनी शर्मा व सुरेश अवस्थी ने महफिल में चार चांद लगा दिए।
तेरी यादें तो जलते हुए दीपक के जैसी हैं, मुझे तो यह अंधेरे में रोने भी नहीं देती...। कवि वाहिद अली वाहिद ने इन पंक्तियों से जोरदार तालियां बटोरीं। मौका था फेस्ट के पहले दिन शाम को आयोजित हुए कवि सम्मेलन का। देर शाम संस्थान के ऑडिटोरियम में जुटे देश के कोने-कोने से आए कवि अरुण जैमिनी, रामेंद्र मोहन त्रिपाठी, पद्मिनी शर्मा व सुरेश अवस्थी ने महफिल में चार चांद लगा दिए।