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घुटने में गठिया के दर्द से परेशान लोगों का दिल खुश कर देगी ये खबर, खुद के लहू से उड़नछू होगी समस्या
Wed, 06 Mar 2019 11:40 AM IST
शिखा पांडेय
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 06 Mar 2019 11:40 AM IST
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घुटने में गठिया के दर्द से परेशान लोगों के लिए एक उम्मीद जगाने वाली खबर है। मरीजों के खून में ही उनके दर्द की दवा मौजूद है। यह बात चौंकाने वाली है, लेकिन सच है। मरीजों के ही खून से निकाली गई प्लाज्मा रिच प्लेटलेट्स (पीआरपी) का इंजेक्शन जब उनके घुटनों में लगाया गया, तो उन्हें दर्द से काफी हद तक राहत मिल गई। कानपुर के मेडिकल कॉलेज में 15 में से 14 मरीजों पर यह परीक्षण सफल रहा है।
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कानपुर के कौशलपुरी निवासी रमेश (63) और उनकी पत्नी भारती (60) को भी इलाज के पहले यह बात अजीब लगी थी, लेकिन जब उनके खून से पीआरपी (प्लाज्मा रिच प्लेट्लेट्स) निकाल कर उनके घुटने में इंजेक्शन लगा और उन्हें आराम मिलने लगा, तो वे हैरत में आ गए। ये मरीज तीन साल से परेशान थे और अस्थि रोग विशेषज्ञों ने दोनों को घुटना प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी थी। इन रोगियों को पीआरपी का अभी एक ही इंजेक्शन लगा है। इतने में ही दोनों को काफी आराम मिला है। जानीपुर (एटा) की बीना देवी को भी पीआरपी के एक इंजेक्शन के बाद ही बहुत राहत मिल गई है।
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मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग के पेन क्लीनिक में मरीजों का इस पद्धति से नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। एनेस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. अपूर्व अग्रवाल के निर्देशन में डॉ. सत्येंद्र त्रिपाठी ने अपने शोध के पहले चरण में घुटने में गठिया के 15 मरीजों पर यह पद्धति अपनाई। इनमें से पीआरपी के एक इंजेक्शन के बाद 14 रोगियों को आराम मिल गया। सिर्फ एक मरीज को कम आराम मिला है।
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ऐसे होता है इलाज
रोगी के शरीर से 30 एमएल खून निकाला जाता है। फिर सेंट्रीफ्यूज मशीन के जरिये खून से प्लाज्मा रिच प्लेट्लेटस (पीआरपी) निकाल ली जाती हैं। इसे रोगी के गठिया ग्रसित घुटने में लगा दिया जाता है। रोगी को पीआरपी के दो से तीन इंजेक्शन तीन महीने के अंतराल पर लगाए जाते हैं और रोगी को आराम मिल जाता है। रोगी के इलाज के समय यह देखा जाता है कि उसे किसी प्रकार का वायरल अथवा बैक्टीरियल संक्रमण न हो।
रोगी के शरीर से 30 एमएल खून निकाला जाता है। फिर सेंट्रीफ्यूज मशीन के जरिये खून से प्लाज्मा रिच प्लेट्लेटस (पीआरपी) निकाल ली जाती हैं। इसे रोगी के गठिया ग्रसित घुटने में लगा दिया जाता है। रोगी को पीआरपी के दो से तीन इंजेक्शन तीन महीने के अंतराल पर लगाए जाते हैं और रोगी को आराम मिल जाता है। रोगी के इलाज के समय यह देखा जाता है कि उसे किसी प्रकार का वायरल अथवा बैक्टीरियल संक्रमण न हो।
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इसलिए होता है फायदा
गठिया रोगी के घुटने की कार्टिलेज घिस जाती है। हड्डियों के आपस में रगड़ने की वजह से उसे दर्द होता है और घुटना जाम होने लगता है। पीआरपी के इंजेक्शन से घुटने की सतह पर चिकनाई आ जाती है, जिससे रोगी को राहत मिलती है।
गठिया रोगी के घुटने की कार्टिलेज घिस जाती है। हड्डियों के आपस में रगड़ने की वजह से उसे दर्द होता है और घुटना जाम होने लगता है। पीआरपी के इंजेक्शन से घुटने की सतह पर चिकनाई आ जाती है, जिससे रोगी को राहत मिलती है।
इस पद्धति से रोगियों को अप्रत्याशित लाभ मिला है। इलाज नि:शुल्क है। इस पद्धति पर अभी और शोध जारी है। - डॉ. अपूर्व अग्रवाल, विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज