ढाेल नगाड़ाें के साथ जब बारात सुषमा के दरवाजे पहुंची थी ताे पूरा परिवार बहुत खुश था। एक एक कर के शादी की सभी रस्माें की शुरुअात हुई। जयमाल हाेने के कुछ देर बाद ही दूल्हे के परिवार ने लड़की के पिता से बुलेट बाइक की मांग की जिसे सुनने के बाद सुषमा ने बिना एक पल गवांये शादी करने से इंकार दिया। सुषमा के इस कदम से उनका परिवार ही नहीं पूरा गांव बहुत खुश है।
बुलेट की मांग पर बारात लौटने वाली सुषमा
बुलेट की मांग पर बारात लौटने वाली सुषमा के परिजनों को बेटी के फैसले पर गर्व और संतोष है। परिजनों का कहना है कि शादी के बाद दहेज लोभियों के चक्कर में फंसकर थाने व कोर्ट के चक्कर काटने से बेहतर है कि बेटी के लिए कोई योग्य वर तलाशा जाए। पिता ने कहा दूल्हे की सरकारी नौकरी लगने के बाद ही वर पक्ष ने बुलेट की मांग शुरू कर दी।
बच गई मेरी लाडाे की जिंदगी
माधौगढ़ में सोमवार को संतोष गौड़ की बेटी सुषमा का विवाह होना था। घर के बाहर ही शादी का पंडाल लगा हुआ था। बारात मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के बिलवां गांव के सुनील पुत्र नवल किशोर की आई थी। शादी में जयमाला के बाद अचानक लड़के वालों ने अतिरिक्त दहेज में बुलेट बाइक की मांग की। यह बात सुषमा को नगवार गुजरी और उसने शादी करने से इंकार कर दिया।
नाैकरी लगने के बाद बढ़ी दहेज की मांग
बुधवार को सुषमा और उसके परिजनों से बात की गई तो पिता संतोष ने बताया कि उसने एक साल पहले बेटी शादी सुनील से तय की थी। तब उनके सामर्थ के अनुसार दान दहेज में बात तय हो गई थी। कुछ माह पहले सुनील की मुंबई में एक्साइज विभाग में संविदा पर नौकरी लग गई, जिससे उनकी दहेज की मांग भी बढ़ गई। शादी के एन मौके पर उन्होंने अपना रंग दिखाते हुए बाइक की मांग कर दी जो देने में वह असमर्थ थे।
जयमाला के बाद चढ़ावा न ले आना उनकी नियत में खोट साबित कर रहा था
शादी में बिरादरी के लोगों से दबाव बनाना और जयमाला के बाद चढ़ावा न ले आना उनकी नियत में खोट साबित कर रहा था। उन्होंने कहा कि जो भी होता है अच्छा ही होता है। उनकी बेटी दहेज लोभियों के पास जाने से बच गई। सुषमा की मां बिट्टी देवी का कहना है दहेज लोभी के साथ बेटी की शादी कराना, बेटी को आग में डालने के बराबर है। भगवान की कृपा रही कि लाडो दहेज लोभियों के चंगुल में जाने से बच गई।