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साहब! मतदान ड्यूटी से नहीं, ट्रक से डर लगता है...कुछ ऐसी ही और भी हैं दिक्कतें
Sun, 05 May 2019 05:19 PM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 05 May 2019 05:19 PM IST
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महिला मतदान कर्मियों ने बताई समस्याएं
- फोटो : अमर उजाला
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तपती दोपहरी में मतदान केंद्र तक का सफर बहुत ही दुरूह होता है। खासकर महिलाओं के लिए यह बहुत मुश्किल है। पांच मई यानी मतदान के ठीक एक दिन पहले यह सोचकर तमाम महिला कर्मचारी सकते में हैं।
महिला मतदान कर्मियों ने बताई समस्याएं
- फोटो : अमर उजाला
लोकतंत्र का महापर्व छह मई को है। कर्मचारियों को पांच मई को ही स्टेडियम ग्राउंड से निकलना है। एक दिन पहले मतदान स्थल पर जाकर चुनावी ड्यूटी करनी है। चुनाव में बसों की संख्या कम होने से प्रशासन ने ट्रकों का इंतजाम करा रखा है। ट्रकों में ईवीएम और वीवीपैट मशीन के साथ खुद जाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। महिलाओं के लिए यह और भी दिक्कत भरा है क्योंकि ट्रकों की ऊंचाई अधिक होने से बैठना दिक्कत भरा होता है।
महिला मतदान कर्मियों ने बताई समस्याएं
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षिका प्रीती वर्मा का कहना है कि इतनी गर्मी में भी लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनाव कराने में कोई दिक्कत नहीं है। हमारा सौभाग्य है कि लोकतंत्र के पर्व में हमारी हिस्सेदारी है, लेकिन यातायात में दिक्कत उठानी पड़ती है। प्रशासन को महिलाओं के लिए बस की व्यवस्था करनी चाहिए। शिक्षिका रेनू शुक्ला का कहती है कि हुसैनगंज विधानसभा क्षेत्र में ड्यूटी लगी है, लेकिन बस का सफर मिलेगा तो चुनाव कराना अच्छा हो जायेगा। जिला मुख्यालय से मतदान केंद्र तक जाने के लिए ट्रक मिलता है, तो बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। चुनाव प्रभारी को चाहिए कि चुनाव में बसों की व्यवस्था अधिक करें।
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महिला मतदान कर्मियों ने बताई समस्याएं
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षिका निर्मला देवी कहती है कि दो बार ट्रक से मतदान स्थल तक जाना पड़ा था। एआरटीओ जिन ट्रकों को भेजते हैं उनमे धूल तक नहीं साफ करवाते हैं। कई बार तो मौरंग और गिट्टी की धूल इतनी ज्यादा रहती है कि ट्रक चलते समय गंदगी आंखों में जाती है। इसके बाद आंखों का इलाज कराना पड़ता है। शिक्षिका रचना देवी कहती है यातायात में लगे साधन अच्छे होने चाहिए। चुनाव कार्मिकों को समझना चाहिए कि एक महिला कैसे ट्रकों मे चढ़ेगी। बिना किसी का सहारा लिए यह संभव नहीं है। पोलिंग पार्टी रवाना होते समय बहुत सारा सामान रहता है। एक ट्रक में करीब 20 लोग चढ़कर जाते हैं। इससे ट्रकों में खड़े रहना पडता है।
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महिला मतदान कर्मियों ने बताई समस्याएं
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पोलिंग पार्टी वीवीपैट और इवीएम मशीन इकट्ठा करते-करते काफी समय हो जाता है। बूथ तक जाने वाले पुलिस कर्मी पहले ही ट्रक में ड्राइवर के पास वाली सीट पर बैठ जाते हैं। इससे ट्रकों के पिछले हिस्से में बैठना पड़ता है।