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यहां BJP में नहीं थम रहा 'विवादों का बवंडर', 'कुछ यूं फूटे लेटर बम', चर्चा में ' Vitara Brezza भी"

Fri, 18 May 2018 09:10 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 18 May 2018 09:10 PM IST
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Differences among Hardoi BJP leaders
हरदोई बीजेपी जिलाध्यक्ष, कार - फोटो : अमर उजाला
यूपी के हरदोई जिले में भारतीय जनता पार्टी के अंदर शुरू हुआ विवादों का बवंडर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिला उपाध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद भाजपा नेता अजय अवस्थी ने जिलाध्यक्ष के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। वहीं पूर्व जिलाध्यक्ष और जिला सहकारी बैंक के नवनिर्वाचित अध्यक्ष विद्याराम वर्मा ने उनके साथ क्षेत्रीय महामंत्री (जनपद प्रभारी) पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। गंगा विचार मंच के जिला संयोजक ने भी भाजपा जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री और क्षेत्रीय महामंत्री के खिलाफ पत्र प्रदेश अध्यक्ष को भेजा है। हालांकि भाजपा जिलाध्यक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। 

आगे की स्लाइड में पढ़ें 'पहला लेटर बम'-

 
Differences among Hardoi BJP leaders
जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री, पूर्व जिला उपाध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विद्याराम वर्मा को गत दिनों जिला सहकारी बैंक का अध्यक्ष भी निर्विरोध चुना गया था। विद्याराम वर्मा ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय को भेजे पत्र में कहा है कि वह सहकारी बैंक के अध्यक्ष के लिए पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी थे। इसके बावजूद भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री, क्षेत्रीय महामंत्री और जिला प्रभारी नीरज सिंह ने उन्हें चुनाव में पराजित करने के लिए षड्यंत्र किया।


जिलाध्यक्ष ने बैंक आकर महामंत्री रामचंद्र राजपूत को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का नामांकन पत्र खरीदवाया और घोषित अधिकृत प्रत्याशी बताया। उन्होंने क्षेत्रीय महामंत्री संगठन को मोबाइल पर पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। काफी जद्दोजहद के बाद उनके दबाव में रामचंद्र राजपूत ने नामांकन वापस लिया। उक्त लोगों ने विद्याराम वर्मा के विरुद्ध अनुचित भाषा का प्रयोग किया। जिससे पार्टी की छवि खराब हुई।  
अगली स्लाइड में पढ़ें 'दूसरा लेटर बम'-

 
Differences among Hardoi BJP leaders
भाजपा जिलाध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला
14 मई को विद्युत विभाग के वितरण खंड दो के तत्कालीन अधिशासी अभियंता रामसनेही यादव पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने के कारण उपाध्यक्ष पद से हटाए गए अजय अवस्थी ने जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री के विरुद्ध प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय को पत्र लिखा है। पत्र में जिलाध्यक्ष पर आरोप लगाया गया है कि निजी द्वेष के कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई।


उन्हें और मीडिया प्रभारी गांगेश पाठक को एक ही प्रकरण में अनुशासनहीनता की नोटिस दी गई, लेकिन कार्रवाई सिर्फ उन पर हुई। आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष तीन माह से सार्वजनिक स्थानों पर ये कहते घूम रहे थे कि अजय अवस्थी को जिला उपाध्यक्ष पद से हटाना है। वह 1988 से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, युवा मोर्चा और भाजपा के पदाधिकारी रहे हैं। श्रीकृष्ण शास्त्री के अलावा किसी ने भी उनकी निष्ठा पर सवाल नहीं उठाए। जिलाध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की भी मांग की गई है।  
अगली स्लाइड में - 'तीसरा लेटर' 

 
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गंगा विचार मंच के जिला संयोजक , भाजपा जिलाध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला
तीसरा लेटर बम गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सुशील अवस्थी छोटे महाराज ने फोड़ा है। प्रदेश अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री, क्षेत्रीय महामंत्री नीरज सिंह और जिला महामंत्री रामचंद्र राजपूत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छोटे महाराज ने लिखा है कि वह 1990 से भाजपा कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं।


उनका कहना है कि सहकारिता चुनाव के दौरान क्रय विक्रय समिति के अध्यक्ष पद के लिए उन्हें क्षेत्रीय महामंत्री संगठन ने प्रत्याशी घोषित किया था। नीरज सिंह, श्रीकृष्ण शास्त्री और रामचंद्र राजपूत ने गैर भाजपाई प्रद्युम्र सिंह का पर्चा भरवा दिया। जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि जो वह चाहेंगे वही होगा। जिला संगठन के प्रत्याशी प्रद्युम्र सिंह हैं। छोटे महाराज का आरोप है कि जिलाध्यक्ष ने उन्हें मतदाताओं के सामने बुलाकर अपमानित किया। ये उक्त प्रकरण पार्टी के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों और क्षेत्रीय महामंत्री संगठन के संज्ञान में है।  

 
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भाजपा जिलाध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला
जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री ने कहा कि सुशील अवस्थी और अजय अवस्थी के पत्रों पर बात करना उनके स्तर से उचित नहीं है। पूर्व जिलाध्यक्ष विद्याराम वर्मा के आरोपों पर जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री ने कहा कि वह नहीं जानते कि ऐसे आरोप क्यों लगा रहे हैं। सहकारिता चुनाव में उनकी पूरी मदद की गई। उनके तत्कालीन प्रतिद्वंद्वी को मंसूरनगर से डेलीगेट तक नहीं बनने दिया गया। सहकारी बैंक के निदेशक मंडल में अधिक से अधिक सदस्य भाजपा के कैसे पहुंचे, इस पर भी विद्याराम वर्मा से लगातार चर्चा हुई।  

अगली स्लाइड में- सोशल मीडिया पर खूब दिख रही जिलाध्यक्ष की कार  
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