सपा सरकार में एडिशनल कमिश्नर केशव लाल की तूती बोलती थी। यादवलैंड के सपा के एक कद्दावर मंत्री से इनकी नजदीकियां रहीं हैं। प्रदेश में जब-जब सपा सरकार रही केशव लाल अपने से ऊंचे ओहदे वाले अफसरों को दरकिनार कर काम करते रहे। यही वजह रही कि ट्रांसफर-पोस्टिंग तक में केशव लाल का सिक्का चलता था।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि सपा के कद्दावर मंत्री के कहने पर केशव लाल को हर बार मनचाहा शहर और मनचाहा काम मिला। सरकार तक पहुंच की हनक में केशव लाल अपने समकक्ष अधिकारियों की एक नहीं चलने देते थे। दो साल से इनकी तैनाती कानपुर जैसे औद्योगिक और वाणिज्यिक उर्वरता वाले शहर में है।
कानपुर जोनल कार्यालय में अपने दो साल के कार्यकाल में इन्होंने समकक्षों की एक नहीं चलने दी। एसआईबी और सचल दल जैसे कमाऊ विंगों की कमान अपने हाथ में रखी। वाणिज्य कर कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों की घुसपैठ इन्हीं की वजह से चल रही थी।
सूत्रों के अनुसार केशव लाल काली कमाई का हिस्सा विभाग के पांच करीबी अधिकारियों में बांटते थे। इस वजह से जोनल कार्यालय के एक बड़े अफसर से इनकी तनातनी रहती थी। दीपावली के समय यह तनातनी सामने आई थी। उक्त बड़े अफसर ने केशव लाल को चुनौती देते हुए समानांतर सचल दल इकाई का गठन कर दिया था।
शहर में अवैध कारोबार पर एक नजर
-5000 करोड़ का मौरंग कारोबार
-5,000 करोड़ की अवैध व फर्जी फर्मे
-एक लाख से ज्यादा अपंजीकृत वाणिज्यिक प्रतिष्ठान
-1000 से ज्यादा अपंजीकृत ट्रैवल्स एजेंसियां