रोटोमैक ग्रुप के मालिक विक्रम कोठारी और उनके बेटे राहुल कोठारी को लेकर सीबीआई की टीम शनिवार को कानपुर आई। देर शाम यहां पहुंची टीम ने उन्हें कोठी ले जाने के बजाए गुप्त स्थान पर रखकर पूछताछ की। वहीं, लोन देने वाले बैंक समूह (कंसोर्टियम) के अधिकारियों से भी पूछताछ की गई। रविवार तड़के बैंक अफसरों को टीम ने छोड़ दिया। इसके बाद विक्रम कोठारी व उनके बेटे को साथ लेकर चली यहां से चली गई। टीम जल्द ही कोठारी के बिजनेस पार्टनरों और बैंक समूह के अफसरों को दिल्ली या लखनऊ तलब कर पूछताछ करेगी।
बिजनेस पार्टनरों के बारे में जानकारी हासिल की
शनिवार को सीबीआई ने विक्रम व राहुल कोठारी को दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया था। दोनों को 11 दिन की कस्टडी रिमांड में भेजा गया है। रिमांड मिलने के बाद देर शाम सीबीआई टीम गुपचुप तरीके से कोठारी पिता-पुत्र को शहर लाई थी। टीम ने शहर में ही एक गुप्त स्थान पर रखकर उनसे पूछताछ की। उनके बिजनेस पार्टनरों के बारे में जानकारी हासिल की।
लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया
सीबीआई ने विक्रम व राहुल कोठारी को दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर लाकर लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया। साथ ही रिमांड की मांग वाली अर्जी देकर बताया कि रोटोमैक कंपनी के चेयरमैन विक्रम कोठारी व मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल कोठारी ने कई बैंकों के कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ मिलकर अरबों रुपयों का घोटाला किया। आरोपियों ने 7 बैंकों को 2919 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है। इस मामले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों का पता लगाया जाना और उनसे आरोपियों का आमना-सामना कराना जरूरी है। इसलिए दोनों आरोपियों का पुलिस कस्टडी रिमांड दिया जाए।
बैंक अफसरों से हुई पूछताछ
विक्रम कोठारी के कर्ज को एनपीए कराने में बैंक अफसरों की मिलीभगत की जांच भी सीबीआई ने शुरू कर दी है। कोठारी को लोन देने वाले बैंक समूह के मुखिया (कंसोर्टियम लीडर) बैंक ऑफ इंडिया, बैंकों इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के लोन विभाग से जुड़े कुछ अफसरों से भी सीबीआई ने यहां पूछताछ की।
हिदायत देकर सीबीआई ने छोड़ दिया
रविवार भोर बैंक अफसरों को शहर न छोड़ने की हिदायत देकर सीबीआई ने छोड़ दिया। इसके बाद टीम विक्रम और राहुल कोठारी को दिल्ली या लखनऊ लेकर चली गई। कंसोर्टियम में शामिल अन्य बैंकों ने 2008 से 2015 तक के बीच कोठारी की फर्मों को लोन दिया था। सीबीआई उस दौरान कंसोर्टियम में शामिल बैंकों के लोन विभाग के अफसरों से विस्तार से पूछताछ कर सकती है।