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प्रसाद की पुड़िया अाैर 'पाप से मुक्ति की रात' कुछ एेसी थी बाबा के अाश्रम की कहानी

Thu, 28 Dec 2017 02:58 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 28 Dec 2017 02:58 PM IST
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inside story of virendra dev dixit hermitage
वीरेन्द्र देव दीक्षित का अाश्रम

बाबा वीरेन्द्र देव दीक्ष‌ित का अाश्रम अाध्यात्म नहीं अय्याशी का अड्डा था। यहां रात हाेते ही लड़क‌ियाें के चीखने च‌िल्लाने की अावाजें अाना शुरु हाे जाती थी। बाबा के अाश्रम का खेल ही न‌िराला था। यहां पाप से मुक्त‌ि के ल‌िये बाबा से प्रसाद की पुड़‌िया लेनी हाेती थी। प्रसाद की पुड़‌िया भी अासानी से नहीं म‌िलती थी। 



 

राम रहीम जैसी ही है वीरेन्द्र देव दीक्ष‌ित कहानी

inside story of virendra dev dixit hermitage
वीरेन्द्र देव दीक्षित अाश्रम में छानबीन करती पुल‌िस
राम रहीम की माफी जैसी ही है बाबा वीरेन्द्र देव दीक्ष‌ित की पाप से मुक्त‌ि की कहानी। बाबा पहले लड़क‌ियाें की कई चरणाें में परीक्षा लेता था। अगर लड़क‌ियां परीक्षा में पास हाेती थीं ताे फ‌िर अाती थी पाप से मुक्त‌ि म‌िलने की रात। इस रात के ल‌िये बाबा व‌िशेष रूप से तैयारी करता था।

 

प्रसाद की पुड़‌िया खुद बनाता था बाबा

inside story of virendra dev dixit hermitage
वीरेन्द्र देव दीक्षित का अाश्रम
लड़क‌ियाें के ल‌िये प्रसाद की पुड़‌िया बनाता था। प्रसाद की पुड़‌िया बनाने का तरीका भी काफी सीक्रेट था। इस काम काे बाबा अपने गुप्त कमरे में अंजाम देता था। जब वह प्रसाद की पुड़‌िया बनाता था ताे उस कमरे में जाने की क‌िसी काे इजाजत नहीं थी।

 
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हर पुड़‌िया पर लड़क‌ियाें का नाम ल‌िख देता था बाबा

inside story of virendra dev dixit hermitage
अाश्रम का घ‌िनाैना सच
अाश्रम से छूटी लड़क‌ियाें ने बताया क‌ि प्रसाद की पुड़‌िया खाते ही उन्हें नीद अा जाती थी। कभी नशा हाे जाता था। बाबा इतना शात‌िर था क‌ि हर पुड़‌िया पर लड़क‌ियाें का नाम ल‌िख द‌िया करता था। ज‌िससे धाेखे से भी प्रसाद की पुड़‌िया बदल ना जाये।

 
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काेरे कागज पर सभी लड़क‌ियाें से ल‌िखवाता था बुराईयां

inside story of virendra dev dixit hermitage
अाश्रम में पुल‌िस काे जाने से राेकती मह‌िलायें
इसके बाद अाती थी पापाें से मु‌क्त‌ि की रात। बाबा सभी लड़क‌ियाें काे बुलाकर एक काेेरे कागज पर अपनी सभी बुराईयां ल‌िखने के ल‌िये कहता था। इसके बाद उस कागज पर लड़क‌ियाें से हस्ताक्षर करवा कर सभी कागजाें काे एक पेटी में डाल देता था। पेटी से लकी ड्रा न‌िकलता था।

 
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