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फैसलाः बहू बोली-'ये मेरे ससुर नहीं हैं', कोर्ट -'हर महीने ससुर को देने को होंगे 6 हजार रुपए'

Wed, 09 May 2018 07:32 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 09 May 2018 07:32 PM IST
सार

court decision about

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court decision about father in law and daughter in law
डेमाे पिक
बहू अपने ससुर को भरण-पोषण के लिए छह हजार रुपये प्रतिमाह दे। माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण अधिनियम के तहत दाखिल मुकदमे में एसडीएम सदर संजय कुमार ने यह फैसला सुनाया है। यह भी आदेश दिया है कि ससुर की बिना अनुमति के बहू मकान नहीं बेच सकेगी। मामला यूपी के कानपुर का है। आगे पढ़ें...



 
court decision about father in law and daughter in law
डेमाे पिक
द्वारिका प्रसाद सोनकर (73) निवासी खपरा मोहाल कैंट ने बहू वर्षा सोनकर के खिलाफ मुकदमा दाखिल किया था। इसमें कहा था कि उसके एक पुत्र वीरेंद्र कुमार और एक बेटी रूपा देवी उर्फबेबी है। रूपा देवी की शादी हो चुकी है। उसने वीरेंद्र सोनकर को पढ़ाया लिखाया। वह बैंक ऑफ बड़ौदा में आफीसर बन गया। 19 अक्टूबर 2013 को उसका आकस्मिक निधन हो गया।

 
court decision about father in law and daughter in law
डेमाे पिक
उसने बेटे वीरेंद्र के  नाम खपरा मोहाल में एक मकान खरीदा था। बहू वर्षा को मृतक बेटे की आश्रित पेंशन बैंक ऑफ बड़ौदा की पटेल नगर शाखा से लगभग 22 हजार रुपये प्रतिमाह मिलती है। बहू खपरा मोहाल का मकान बेचना चाहती है। इससे उसे रोका जाए और उसे भरण पोषण के लिए छह हजार रुपये दिलाया जाए। कोर्ट ने द्वारिका प्रसाद सोनकर के पक्ष में फैसला सुनाया।


 
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डेमाे पिक
कोर्ट में कहा ये मेरे ससुर नहीं, वह मर चुके
कोर्ट में वर्षा देवी ने कहा कि मुकदमा दाखिल करने वाला वृद्ध उसका ससुर नहीं है। उसके ससुर का निधन 2012 में हो चुका है। मुकदमा दाखिल करने वाला व्यक्ति उसके ससुर द्वारिका प्रसाद सोनकर के सगे भाई गोपी प्रसाद यानी उसके चचिया ससुर हैं। वह चचिया ससुर को भरण पोषण नहीं दे सकती। वर्षा ने आरोप लगाया कि गोपी प्रसाद घर पर कब्जा करने चाहते हैं। सबूत के तौर पर उसने शादी की फोटो और वोटर आईडी दाखिल की। जवाब में द्वारिका ने कोर्ट में कहा कि इस शादी से पहले वीरेंद्र कुमार और अर्चना सोनकर के विवाह संबंधी मुकदमा रायबरेली में चला था। इसमें उसके बेटे ने पिता के नाम के आगे गोपी प्रसाद लिखा था। द्वारिका प्रसाद और गोपी प्रसाद एक ही व्यक्ति है। अलग-अलग नहीं। बेटे के निधन के बाद बहू को पेंशन मिल रही है इसलिए उस पेंशन से उसे भरण-पोषण राशि दिलाई जाए। कोर्ट ने वर्षा का आरोप खारिज कर दिया। 
 
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