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कानपुर के चर्चित दिव्या हत्याकांड में आया फैसला, मुख्य अभियुक्त पीयूष और भाई मुकेश को आजीवन कारावास

Wed, 05 Dec 2018 02:21 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 05 Dec 2018 02:21 PM IST
सार

- स्कूल गेट पर बेटी की उंगली छोड़ी तो फिर कभी हाथ न थाम सकी
- पथराई आंखों के सूख चुके आंसुओं के बीच छेड़ी इंसाफ की लड़ाई
- कई उतारचढ़ाव भी देखे, लखनऊ और दिल्ली तक पहुंचाई आवाज

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convict of Divya murder case sentenced to life imprisonment
दिव्या हत्याकांड का आया फैसला

विस्तार

कानपुर का चर्चित दिव्या हत्याकांड में आज फैसला आ गया है। इस मामले में कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त पीयूष और भाई मुकेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दो अन्य आरोपियों को रिहा कर दिया गया है। 
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बताते चलें कि आठ साल पहले 27 सितंबर 2010 में दिव्या के साथ उसके ही स्कूल में दरिंदगी और उसकी मौत हुई थी। इस घटना से आहत मां अब न्याय के मंदिर से इंसाफ की आस लगाए बैठी थी। लंबी लड़ाई में उसने कई उतार चढ़ाव देखे। जांच की लंबी प्रक्रिया का हिस्सा बनी। थाने और कोर्ट के कई चक्कर लगाती रही।
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एक मां अपनी फूल सी बच्ची दिव्या को रोज की तरह 27 सितंबर 2010 की सुबह रावतपुर स्थित ज्ञानस्थली स्कूल में छोड़कर जाती है। बच्ची स्कूल में कक्षा-7 की छात्रा थी। दोपहर लगभग एक बजे स्कूल की आया गंभीर हालत में उसे घर के बाहर छोड़कर भाग जाती है। 
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convict of Divya murder case sentenced to life imprisonment
दिव्या हत्याकांड का आया फैसला
पड़ोसी उसे अस्पताल ले जाते हैं, लेकिन डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा पाते। बेटी की मौत की खबर सुन मां सुधबुध खो बैठती है। मामले में एफआईआर दर्ज होती है, लेकिन पुलिस के लीपापोती वाले रवैये से आक्रोश पनपने लगता है। मामले का खुलासा करते हुए पुलिस पड़ोस के ही एक युवक को जेल भेज देती है।

स्कूल प्रबंधन को क्लीनचिट देती पुलिस की रिपोर्ट उसके गले की फांस बन जाती है। सैकड़ों शहरवासी सामाजिक संस्थाओं और सियासी संगठनों के बैनर तले सड़कों पर उतर आते हैं। मामला तूल पकड़ते देख तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मामले की सीबीसीआईडी जांच के आदेश दिए थे।

जांच में स्कूल प्रबंधन के दोषी पाए जाने पर प्रबंधक चंद्रपाल, उसके दो बेटों मुकेश और पीयूष व एक कर्मचारी संतोष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है। लगभग दो साल तक जेल में रहने के बाद चंद्रपाल, मुकेश और संतोष को हाईकोर्ट से जमानत मिल जाती है।

convict of Divya murder case sentenced to life imprisonment
दिव्या हत्याकांड का आया फैसला
आरोपियों के खिलाफ कोर्ट आरोप तय करती है, लेकिन कानूनी दांव-पेच में उलझाकर आरोपी मामले को हाईकोर्ट ले जाते हैं। जहां से कुछ दिन के लिए सुनवाई पर रोक लग जाती है। इसके बाद कोर्ट में दोबारा आरोपियों पर आरोप तय किए जाते हैं और गवाही शुरू हो जाती है।

स्कूल के कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और डॉक्टरों समेत लगभग तीन दर्जन गवाह कोर्ट में पेश होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में एक लंबा अरसा गुजर गया। आठ साल से मां अपनी बेटी के साथ हुई दरिंदगी और उसकी मौत के लिए दोषी लोगों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में आज कामयाब हो ही गयी। 
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