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कोचिंग में आगे बैठने को लेकर शुरू हुआ विवाद, फिर चली गोलियां, मौत से सिहर उठा शहर

Sat, 20 Jan 2018 11:22 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 20 Jan 2018 11:22 AM IST
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Controversy about sitting ahead in coaching
डेमो पिक
यूपी के कानपुर में कोचिंग में आगे की सीट पर बैठने के विवाद में रतनपुर पनकी में गोलियां चल गईं। इसमें दोस्त के भाई की जान बचाने में एक युवक की जान चली गई। मामले की कई वजह और भी बताई जा रही हैं...
Controversy about sitting ahead in coaching
डेमो पिक
रतनपुर पनकी निवासी सिपाही श्रवण कुमार उर्फ शेरू यूपी-100 में तैनात है। उसकी ड्यूटी कल्याणपुर थाने में है। श्रवण के दो छोटे भाई आकाश और विकास हैं। विकास 10वीं का छात्र है। वह इलाके में ही कोचिंग पढ़ता है। मंगलवार को कोचिंग में उसका इलाके के मुन्ना नामक छात्र से आगे की सीट पर बैठने को लेकर विवाद हो गया। उसी दिन कोचिंग से लौटते वक्त विकास और मुन्ना की बाइक आपस में टकरा गई। इससे विवाद और बढ़ गया। बुधवार को दोनों में फिर आगे की सीट पर बैठने को लेकर विवाद हुआ। उसी रात मुन्ना मुहल्ले में रहने वाले दबंग अपराजित और कुछ अन्य साथियों के साथ विकास के घर पहुंच गया और हंगामा किया। सिपाही ने रतनपुर थाने में अपराजित व उसके साथियों के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन चौकी प्रभारी ने समझौता करा दिया। सिपाही की तहरीर पर भी कार्रवाई न होने पर अपराजित के हौसले बढ़ गए। 

 
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अपराजित के डर से विकास कई दिनों से स्कूल नहीं जा रहा था। शुक्रवार को विकास स्कूल गया। दोपहर में सिपाही श्रवण अपने दोस्त दीपक के साथ विकास को स्कूल से लेकर घर लौट रहा था। रास्ते में सभी अपराजित के घर के बाहर रुक गए। इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। अपराजित ने तमंचे से विकास पर गोली चला दी। दीपक ने विकास को धक्का देकर हटा दिया, लेकिन गोली दीपक के माथे पर लग गई। इसके बाद आरोपी ने दोबारा विकास पर गोली चलाई। गोली उसकेमाथे से छूते हुए निकल गई। सिपाही श्रवण ने यूपी-100 और पनकी थाने को घटना की सूचना दी। एसएसपी अखिलेश कुमार, एसपी पश्चिम डॉ.गौरव ग्रोवर फोर्स के साथ मौकेपर पहुंच गए। पुलिस ने विकास और दीपक को हैलट भेजा, जहां दीपक की मौत हो गई। विकास को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एसएसपी ने बताया कि आरोपी अपराजित की मां बेबी और बहन को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। दीपक के परिजनों की तहरीर पर अपराजित और उसके परिजनों पर रिपोर्ट दर्जकर कार्रवाई की जा रही है।

 
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मैथा का रहने वाला था दीपक
दीपक (22) मूल रूप से मैथा (कानपुर देहात) का रहने वाला था। यहां पनकी गंगागंज में उसके पिता सत्य नारायण, मां अंजू और छोटा भाई प्रकाश रहते हैं। सत्य नारायण प्राइवेट सिक्योरटी गार्ड है। बड़ा बेटा दीपक रतनपुर पनकी कालोनी में नाना महेंद्र तिवारी के घर में रहकर सेना भर्ती की तैयारी कर रहा था। दीपक की क्षेत्र में रहने वाले सिपाही श्रवण कुमार से दोस्ती थी। हत्यारोपी की मां बेबी सरकारी अस्पताल में नर्स है। वर्तमान में कल्याणपुर के एक अस्पताल में तैनात है। 

 
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डेमो पिक
जाम लगा किया हंगामा
दीपक की मौत की खबर सुनते ही परिवार के लोगों में कोहराम मच गया। दीपक के नाना महेंद्र तिवारी, नानी रोहिणी, मामा जीतू और छोटू हैलट पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद परिजन दीपक का शव पनकी लेकर पहुंचे। वहां पनकी-रतनपुर टेपो स्टैंड चौराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। दीपक की मां अंजू का कहना है कि आकाश और अपराजित में हुए झगड़े के आधार पर कार्रवाई कर देती, तो उनके बेटे की हत्या नहीं होती। पुलिस के अपराजित को छोड़ने से उसका मनोबल बढ़ गया और उसने दीपक को मार डाला। इसी दौरान अंजू की हालत बिगड़ गई। परिजन शव सड़क पर छोड़कर अंजू को पास स्थित निजी अस्पताल लेकर चले गए। परिजनों का कहना है कि अंजू को दिल का दौरा पड़ा है। इस दौरान करीब दो घंटे तक जाम लगा रहा।

हत्या के पीछे कई और वजह
दीपक के हत्या के पीछे इलाके के लोग वर्चस्व और प्रेम प्रसंग को वजह बता रहे हैं। थानाध्यक्ष का कहना है दीपक की हत्या के पीछे कई कारण बताए गए हैं। सभी बिन्दुओं पर जांच की जा रही है। 
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