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'10 का सिक्का असली या नकली', आखिर इतना कन्फ्यूजन क्यों! जानें सच्चाई

Fri, 10 Aug 2018 06:10 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 10 Aug 2018 06:10 PM IST
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Confusion on 10 rupee coin and reality
10 रुपये का सिक्के - फोटो : अमर उजाला
एक रुपये के छोटे सिक्के और दस रुपये के सिक्कों को ग्राहकों और दुकानदार ने नकार दिया है। इसके पीछे असली-नकली का भ्रम बना है। जिन दस के सिक्कों में बीच में 10 छपा होता है। उसको ग्राहक और दुकानदार लेने से मना कर देता है। यही हाल एक के छोटे सिक्के का है। यूपी के इटावा जिले में दुकानदारों का तर्क है कि ग्राहक उनसे सिक्का नहीं लेता है। उनका मानना है कि ये सिक्के नकली हैं।


 
Confusion on 10 rupee coin and reality
दुकानदार ने बताई अपनी समस्या - फोटो : अमर उजाला
आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी के दौरान रिजर्व बैँक ने 200 करोड़ रुपये की रेजगारी जारी की थी। इनमें दस के दो तरह के सिक्के जारी हुए थे। पहले वाले सिक्कों में 10 का निशान गोले के बीच में था। बाद वाले सिक्कों में 10 का निशान गोले के नीचे हिस्से में लगकर आया था। इसी के साथ एक रुपये के छोटे सिक्कों को डिजाइन किया गया था। यह व्यवस्था लोगों की सहूलियत के लिए बनाई गई थी। लेकिन सोशल मीडिया पर भ्रामक खबर फैल गई कि इनमें से एक सिक्का नकली और एक असली है। इस भ्रम से जनपद के दुकानदार और ग्राहक अभी भी उबर नहीं पाए हैं।
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डेमो पिक
सिक्कों का लेनदेन न होने से जनरल स्टोर वाले, सब्जी विक्रेता, स्टेशनरी, हथठेला पर सामान बेचने वाले दुकानदार सबसे ज्यादा परेशान हैं।  इस बारे में चौगुर्जी स्थित जनपद ईंट निर्माता समिति के सचिव राकेश कुमार जैन का कहना है कि उनके पास चलन से बाहर एक रुपये के छोटे सिक्कों की संख्या तीन सौ से ज्यादा है। कहा कि पता नहीं था कि सिक्के को लेकर भी ऐसी नौबत आ सकती है। कहा भले सिक्के चलन में न हो लेकिन सरकारी मुद्रा की कद्र करते हैं। उसे सुरक्षित रखा हुआ है। 

 
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बलराम सिंह चौराहा पर सिंह इलेक्ट्रॉनिक्स के संचालक शैलेंद्र सिंह का कहना है कि पहले तो दस रुपये का सिक्का ग्राहक नहीं लेता है और न ही थोक डीलर ले रहा है। ऐसे में हम क्या करें। उनके पास काफी सिक्के पड़े हैं। शास्त्री चौराहा स्थित स्टेट बैंक के सामने जनरल स्टोर के दुकानदार विनय कुमार जैन ने इस मुद्दे पर कहा कि ग्राहक के आने पर मजबूरी में कभी-कभार एक रुपये के छोटे  सिक्के लेने भी पड़ते हैं। अपनी ओर से यही सिक्के अन्य ग्राहक को देने और इनकार करने पर बात भी माननी पड़ती है। उनका कहना था के नहीं मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लीड बैंक मैनेजर ने बताया कि दोनों ही सिक्के असली हैं। रिजर्व बैंक के सीधे निर्देश हैं कि अगर कोई दुकानदार सिक्का लेने से मना करें तो उसकी शिकायत पुलिस से कीजिए, तत्काल कार्रवाई की जाएगी। 



 
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एलडीएम देवेंद्र कुमार का मानना है कि यह समस्या छोटे शहरों में है। बड़े शहरों में हर प्रकार का सिक्का चल रहा है। आरबीआई का स्पष्ट निर्देश है कि एक रुपये का छोटा सिक्का लेना होगा। कोई नहीं लेता है इसके लिए पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने का कहना है कि दस का सिक्का साल 2012 में चलन में आया था। उसके बाद नोटबंदी होने से रिजर्व बैंक ने अधिक मात्रा में सिक्का निकाला। दोनों ही सिक्के असली हैं। इसमें भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। रुपये का आर कटा होने से लोगों में इस सिक्के को लेकर भी भ्रम फैला था। अब यह सिक्का चलन में है। 
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