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कानपुर: व्हॉट्सएप वाली साक्षी ने किया था बृजेश का अपहरण और हत्या, रिकवर चैट से हुआ खुलासा
Wed, 29 Jul 2020 10:05 AM IST
प्राची प्रियम
सूरज शुक्ला, कानपुर
सूरज शुक्ला, कानपुर
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 29 Jul 2020 10:05 AM IST
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बृजेश पाल हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर देहात के बृजेश पाल हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। हत्यारोपी बृजेश से युवती बनकर व्हॉट्सएप चैट करता था। उसने हनीट्रैप में बृजेश को फंसाकर आधी रात को मिलने के लिए बुलाया था और कार में उसका अपहरण कर हत्या कर दी। इसके बाद घर वालों को फिरौती के लिए फोन किया।
बृजेश पाल हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बृजेश कुछ दिनों से साक्षी नाम की युवती से चैट कर रहा था। फोन पर कभी बातचीत नहीं हुई थी। साक्षी बनकर यह चैटिंग खुद आरोपी सुबोध करता था। पुलिस की जांच में पता चला कि 15 जुलाई की रात भी दोनों चैटिंग कर रहे थे।
बृजेश पाल हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
इसी दौरान सुबोध ने बृजेश से अपने घर के बाहर आने को कहा। कुछ दूर पर सुबोध अपनी स्विफ्ट कार लेकर खड़ा था। यहीं से उसने बृजेश का अपहरण कर लिया। रास्ते में शराब में नशीली दवा मिलाकर जबरन शराब पिलाई। इसके बाद बृजेश बेसुध हो गया था। करीब दो घंटे बाद ही तार से गला घोंटकर उसे मार दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी सुबोध ने खुद इस घटनाक्रम को कबूल किया है।
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बृजेश पाल हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
बृजेश घर पर भूल गया था मोबाइल, इसी की मदद से सुबोध तक पहुंची पुलिस
पुलिस के मुताबिक बृजेश दो मोबाइल रखता था। एक पर व्हॉट्सएप चलाता था, दूसरे फोन का इस्तेमाल कॉलिंग के लिए करता था। जिस रात उसका अपहरण हुआ, घर से निकलते समय वह व्हॉट्सएप वाला मोबाइल घर में ही भूल गया। पुलिस ने उसके घर से मोबाइल बरामद कर चैट रिकवर करवाया।
पुलिस के मुताबिक बृजेश दो मोबाइल रखता था। एक पर व्हॉट्सएप चलाता था, दूसरे फोन का इस्तेमाल कॉलिंग के लिए करता था। जिस रात उसका अपहरण हुआ, घर से निकलते समय वह व्हॉट्सएप वाला मोबाइल घर में ही भूल गया। पुलिस ने उसके घर से मोबाइल बरामद कर चैट रिकवर करवाया।
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बृजेश पाल हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद एक दर्जन नंबर सर्विलांस पर लगाए गए। इसमें से साक्षी नाम से सेव नंबर वारदात की रात से बंद था। यहीं से पुलिस की शक की सुई घूम गई। पुलिस ने इस नंबर की डिटेल निकलवाई तो पता चला कि फेंक आईडी से सिम लिया गया था। सर्विलांस ने बी पार्टी की सीडीआर निकाली यानी इस नंबर से जिसे कॉल की गई थी। इसके बाद पुलिस सुबोध तक पहुंची।