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बंद हुईं कंपनियों के खातों में हुआ था 150 करोड़ का लेनदेन, बैंकों की भूमिका की होगी जांच
Wed, 20 Feb 2019 03:39 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 20 Feb 2019 03:39 PM IST
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कानपुर में बंद हो चुकी कंपनियों के बैंक खातों में 150 करोड़ रुपये के लेनदेन के मामले में जीएसटी इंटेलिजेंस के अफसर अब संबंधित बैंकों की भूमिका की जांच करेंगे। जीएसटीआई का मानना है कि बैंकों की मिलीभगत के बगैर बंद कंपनियों के खातों में लेनदेन होना संभव नहीं है। इसके अलावा यह बात भी सामने आई है कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज और बैंकों के बीच भी तालमेल नहीं है।
जीएसटीआई के अफसर जांच पूरी करने के बाद इसकी रिपोर्ट अप्रत्यक्ष कर बोर्ड को भी सौंपेंगे। जीएसटीआई के सूत्र बताते हैं कि बंद हुई कंपनियों के नाम व पते हासिल कर लिए हैं। उन स्थानों पर छानबीन भी कर ली गई है। सभी कंपनियां अपने दर्ज पतों पर नहीं मिलीं। माना जा रहा है कि ये कंपनियां कभी उन पतों पर रही ही नहीं। बोगस साबित होने की वजह से उन पर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने कार्रवाई की थी।
इसी वजह से ऐसी कंपनियों की अधिकृत वेबसाइट पर लाल रंग से स्ट्राइक ऑफ लिखा गया है ताकि शेयरधारक या कोई भी व्यक्ति यह जान सके कि कंपनी बंद हो चुकी है। बावजूद इसके करीब आधा दर्जन बैंकों में बंद हुई कंपनियों के खातों से लेनदेन हुआ। भारी भरकम लेनदेन होने के बाद भी बैंक के अफसर अलर्ट नहीं हुए। जीएसटीआई के अफसर जल्द ही संबंधित बैंकों के अफसरों से पूछताछ करेंगे।
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जीएसटीआई के अफसर जांच पूरी करने के बाद इसकी रिपोर्ट अप्रत्यक्ष कर बोर्ड को भी सौंपेंगे। जीएसटीआई के सूत्र बताते हैं कि बंद हुई कंपनियों के नाम व पते हासिल कर लिए हैं। उन स्थानों पर छानबीन भी कर ली गई है। सभी कंपनियां अपने दर्ज पतों पर नहीं मिलीं। माना जा रहा है कि ये कंपनियां कभी उन पतों पर रही ही नहीं। बोगस साबित होने की वजह से उन पर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने कार्रवाई की थी।
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इसी वजह से ऐसी कंपनियों की अधिकृत वेबसाइट पर लाल रंग से स्ट्राइक ऑफ लिखा गया है ताकि शेयरधारक या कोई भी व्यक्ति यह जान सके कि कंपनी बंद हो चुकी है। बावजूद इसके करीब आधा दर्जन बैंकों में बंद हुई कंपनियों के खातों से लेनदेन हुआ। भारी भरकम लेनदेन होने के बाद भी बैंक के अफसर अलर्ट नहीं हुए। जीएसटीआई के अफसर जल्द ही संबंधित बैंकों के अफसरों से पूछताछ करेंगे।
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बढ़ सकता है लेनदेन
जीएसटीआई के सूत्र बताते हैं कि फिलहाल 15 से 20 बंद कंपनियों में लेनदेन के तथ्य हाथ लगे हैं, लेकिन यह मामला और भी बड़ा हो सकता है। न जाने कितनी कंपनियों में इस तरह का लेनदेन हुआ होगा। इस मामले की पड़ताल के सरकार के अन्य विभागों को भी सूचित किया जाएगा।
ये है मामला
डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीएसटीआई) की टीम ने चार दिन पहले कानपुर, फर्रुखाबाद और नई दिल्ली में 125 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों की खरीद बिक्री का खेल पकड़ा था। शुरुआती जांच में करीब 23 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी सामने आई है, लेकिन मामला इससे कहीं बड़ा है। अफसरों को आशंका है कि बिना माल की खरीद बिक्री के सिर्फ बिलों पर माल बेचने और खरीदने का व्यापक खेल चल रहा है। ऐसे बिलों की बिक्री करने वाले नामचीन कंपनियों को भी फर्जी आईटीसी का लाभ पहुंचा रहे हैं। इस मामले में अब तक एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जीएसटीआई के सूत्र बताते हैं कि फिलहाल 15 से 20 बंद कंपनियों में लेनदेन के तथ्य हाथ लगे हैं, लेकिन यह मामला और भी बड़ा हो सकता है। न जाने कितनी कंपनियों में इस तरह का लेनदेन हुआ होगा। इस मामले की पड़ताल के सरकार के अन्य विभागों को भी सूचित किया जाएगा।
ये है मामला
डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीएसटीआई) की टीम ने चार दिन पहले कानपुर, फर्रुखाबाद और नई दिल्ली में 125 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों की खरीद बिक्री का खेल पकड़ा था। शुरुआती जांच में करीब 23 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी सामने आई है, लेकिन मामला इससे कहीं बड़ा है। अफसरों को आशंका है कि बिना माल की खरीद बिक्री के सिर्फ बिलों पर माल बेचने और खरीदने का व्यापक खेल चल रहा है। ऐसे बिलों की बिक्री करने वाले नामचीन कंपनियों को भी फर्जी आईटीसी का लाभ पहुंचा रहे हैं। इस मामले में अब तक एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हो चुकी है।