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जंग के दौरान कैसे रहते हैं जवान, सोने तक का नहीं मिलता है मौका, 24 घंटे की होती है ड्यूटी
Tue, 19 Feb 2019 06:23 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 19 Feb 2019 06:23 AM IST
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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में भारत के 40 वीर सपूहों ने अपनी जान न्याैछावर कर दी। इसके बाद से सेना और आतंकियों के बीच लगातार जंग जारी है। पुलवामा एनकाउंटर में सोमवार को पांच और वीर सपूत शहीद हो गए और तीन आतंकी ढेर हो गए हैं।
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क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप रात को चैन की नीद सोते हैं तो आपको सुरक्षित रखने के लिए कोई जंग लड़ रहा होता है। उसे एक पल के लिए भी सोना नसीब नहीं होता क्योंकि उसकी हाथों में देश को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी होती है। जंग के दौरान सैनिक खड़े-खड़े ही झपकियां मार लेते हैं।
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हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में पहली बार आयोजित हुए टेडेक्स टॉक में कई बड़े वक्ताओं ने हरकोर्टियंस का दिल जीत लिया। रिटायर्ड मेजर जनरल पीके सहगल ने 1962, 1965, 1971 और 1999 की जंग के दौरान की कई बातें साझा कीं।
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पीके सहगल ने बताया कि जंग के दौरान जवानों को सोने तक का मौका नहीं मिलता था। 24 घंटे ड्यूटी होती था। वह उन दिनों पायलट हुआ करते थे। जंग में जवान खड़े-खड़े ही झपकियां लेकर नींद पूरी कर लेता था।
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उन्होंने हरकोर्टियंस को प्रेरित किया। कहा कि जो भी आपको जिंदगी में करना है उसे पूरी मेहनत और लगन से करो। डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रामनरेश त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। कहा कि इस तरह के आयोजन से छात्रों का बौद्धिक विकास होता है।