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जब चंबल के बागियों से हुई फिल्म सोनचिड़िया के बागियों की दिलचस्प मुठभेड़, जानिए फिर क्या हुआ
Sun, 24 Feb 2019 02:13 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 24 Feb 2019 02:13 AM IST
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‘अमर उजाला’ बागी बोलता है संवाद कार्यक्रम में शनिवार को चंबल के बागियों संग फिल्म सोनचिड़िया के बागियों की दिलचस्प मुठभेड़ हुई। चंबल के बागियों ने अपने दस्यु बनने की असली कहानी बयां की, वहीं फिल्म के मुख्य अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत, अभिनेत्री भूमि पेडनेकर, रणवीर शौरी और निर्देशक अभिषेक चौबे ने फिल्म से जुड़ी कई बातें साझा कीं।
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प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (पीएसआईटी) में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की भीड़ उमड़ी थी। शुरुआत में ही फिल्म का ट्रेलर देख लोग रोमांचित हो उठे। हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और फिर शुरू हुआ असल बागी और फिल्मी बागियों के बीच संवाद का कार्यक्रम। शुरूआत अभिषेक चौबे ने की।
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उन्होंने फिल्म और उससे जुड़ी कई बातें साझा कीं। बताया, कि हर इंसान अपने जीवन में कभी न कभी बागी बनता है। कुछ ऐसी परिस्थितियां उसके सामने आती हैं जब वह खुद को अकेला महसूस करता है। ऐसे समय वह जो फैसला लेता है, उसी से वह बागी कहलाने लगता है। इस पर दस्यु सुंदरी सीमा परिहार ने जवाब दिया, फिल्मकारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अक्सर जो फिल्में डाकुओं और दस्यु सुंदरियों के जीवन पर बनती हैं, वह हकीकत से परे होती हैं।
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फिल्मकारों को चाहिए कि वह असल की जिंदगी में इन सभी का सामना कर चुके लोगों से मिलने के बाद फिल्म बनाएं ताकि लोग सच्चाई जान सकें। अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने कहा कि हर इंसान यही चाहता है कि उसका देश, समाज, गांव आगे बढ़े लेकिन कई बार ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जब इंसान गलत राह पर चल पड़ता है। यही बागी बनने की शुरूआत होती है।
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सुशांत सिंह राजपूत ने कहा कि सपने हर किसी को देखने चाहिए। चाहे वह छोटे शहर से हों या बड़े। उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़ी बातें साझा कीं। बताया कि कैसे उन्होंने एक छोटे से शहर से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और फिर फिल्मी पर्दे पर पहुंचे।