फिल्म ‘तारे जमीन पर’ में अपनी एक्टिंग से सभी के दिलों में छा जाने वाले नन्हे कलाकार दर्शील सफारी (ईशान अरोड़ा) अब पहले से काफी बदल गए हैं। दर्शील को देखते ही कोई पहचान भी नहीं सकता कि यह वह लड़का है 2007 में जिसकी एक्टिंग का दीवाना पूरा बॉलीवुड हो गया था। दर्शील रविवार को कानपुर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि
मोटिवेशनल (प्रेरणादायक) फिल्में जीवन में बड़ा प्रभाव डालती हैं। इसीलिए वे इस तरह की फिल्में करते हैं। ये फिल्में बच्चों ही नहीं बड़ों के लिए भी जरूरी हैं। क्योंकि हताशा और निराशा के दौर से तो सभी गुजरते हैं। दर्शील सफारी का जन्म 9 मार्च 1997 को मुंबई में हुआ था। एक्टिंग के साथ-साथ दर्शील अपनी उच्च शिक्षा कॉमर्स विषय से जारी रखे हुए हैं।
प्रोफेसर और छात्र ने एक-दूसरे से सीखा
कानपुर कैंट स्थित बिलाबांग हाई इंटरनेशनल स्कूल में रविवार को टू एडोरबल लूजर्स नाटक का मंचन हुआ। इसमें अभिनेता दर्शील सफारी और अभिषेक पटनायक ने शानदार अदाकारी से दर्शकों की जमकर तालियां बटोरी। नाटक से संदेश दिया गया कि शिक्षकों को आर्थिक स्वार्थ नहीं रखना चाहिए। उन्हें आदर्श शिक्षक बनकर कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए।
प्रोफेसर जगन्नाथ महापात्रा उर्फ जॉली (अभिषेक पटनायक) से ट्यूशन पढ़ने के लिए छात्र अक्षय (अभिनेता दर्शील सफारी) जाता है। अक्षय जब फीस के बारे में पूछता है तो प्रोफेसर जॉली कोई फीस न लेने की बात कहते हैं। शुरूआत में अक्षय उनसे काफी डरता है लेकिन धीरे-धीरे दोनों दोस्त की तरह हो जाते हैं। इससे वह बेझिझक अपनी जिज्ञासा शांत कर लेता है। मंचन में जहां अक्षय ने प्रोफेसर जॉली से पढ़ाई की बारीकियां सीखी। वहीं, प्रोफेसर ने अक्षय से कई शब्दों के उच्चारण से सीखे।
संदेश दिया गया कि जरूरी नहीं शिक्षक ही छात्र को सिखाए बल्कि शिक्षक भी छात्र से कुछ न कुछ सीख सकते हैं। इसमें कोई गुरेज नहीं करना चाहिए। अंत में स्कूल के बच्चों ने दोनों कलाकारों से आटोग्राफ और सेल्फी भी ली। स्कूल की प्रिसिंपल प्रीति अग्रवाल मौजूद थीं।