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इंतजार खत्म, यहां फिर शुरू होने जा रहा 167 साल पुराना 'आशिकों का मेला'

Sun, 14 Jan 2018 11:47 AM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 14 Jan 2018 11:47 AM IST
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Aashikon ka Mela going to start in banda
हर वर्ष मकर संक्रांति पर प्रेमी नटबली करते हैं याद
अपनी प्रेमिका को पाने के लिए सूत की रस्सी पर चलकर नदी पार करते समय जान गंवा बैठे जवां नटबली की याद में एक बार फिर ‘आशिकों का मेला’ तैयार है। बांदा की सीमा पर केन नदी और भूरागढ़ दुर्ग के बीच बने प्राचीन मंदिर दो प्रेमियों की याद दिलाते हैं। प्रेमी-प्रेमिका इस 167 साल पुराने मेले का बेसब्री से इंतजार करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि...


 
Aashikon ka Mela going to start in banda
डेमो पिक
ऐसा कहा जाता है कि महोबा के सुगिरा का रहने वाला नोने अर्जुन सिंह भूरागढ़ दुर्ग का किलेदार था। यहां से कुछ किलोमीटर दूर सरबई (मध्य प्रदेश) गांव है। वहां नट जाति के लोग आबाद थे। अक्सर करतब दिखाने और कामकाज के लिए नट भूरागढ़ आते थे।

 
Aashikon ka Mela going to start in banda
आशिकों का मेला
किले में काम करने वाले एक युवा नट से किलेदार की बेटी को प्यार हो गया। नोने अर्जुन सिंह को इसका पता चला तो उसने प्रेमी युवा नट से यह शर्त रख दी कि सूत की रस्सी पर चलकर नदी पार कर किले में आए। अगर ऐसा कर लेगा तो वह अपनी बेटी से उसकी शादी कर देगा। नट ने शर्त मान ली। और फिर...


 
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Aashikon ka Mela going to start in banda
आशिकों का मेला
मकर संक्रांति के दिन सन 1850 में नट ने प्रेमिका के पिता की शर्त पूरी करने के लिए नदी के इस पार से लेकर किले तक रस्सी बांध दी। इस पर चलता हुआ वह किले की ओर बढ़ने लगा। उसका हौसला बढ़ाने के लिए नट बिरादरी के लोग रस्सी के नीचे चलकर गाजे-बाजे के साथ लोक गीत-संगीत गा बजा रहे थे। नट ने रस्सी पर चलते हुए नदी पार कर ली और दुर्ग के करीब जा पहुंचा। यह तमाशा नोने अर्जुन सिंह किले से देख रहा था। उसकी बेटी भी अपने प्रेमी के साहस का नजारा देख रही थी।

 
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Aashikon ka Mela going to start in banda
डेमो पिक
युवा नट दुर्ग में पहुंचने ही वाला था तभी किलेदार नोने अर्जुन सिंह ने रस्सी काट दी। नट नीचे चट्टानों पर जा गिरा और उसकी वहीं पर मौत हो गई। प्रेमी की मौत का सदमा किलेदार की बेटी को बर्दाश्त न हुआ और उसने भी किले से छलांग लगाकर जान दे दी।

 
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