कालिंजर दुर्ग विकास के लिए आठ करोड़ 70 लाख रुपये मंजूर हुए हैं। इसके लिए शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। यह जानकारी मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई कालिंजर दुर्ग समिति की बैठक में पर्यटन सूचना अधिकारी ने दी। यह दुर्ग कई रहस्यों और मान्यताओं की वजह से विश्व में प्रसिद्ध है। यह लोगों को धार्मिक आस्था से भी जोड़े हुए है।
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कालिंजर दुर्ग विकास समिति की बैठक में मौजूद डीएम व अन्य अधिकारी
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सूचना अधिकारी ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार ने यह राशि स्वीकृत की है। इसका काम वायपोस लिमिटेड द्वारा कराया जाएगा। आचार संहिता खत्म होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। बैठक की अध्यक्षता कर रहे डीएम हीरा लाल ने बताया कि जिले के विकास में पर्यटकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्हें कालिंजर के प्रति आकर्षित करने के लिए यहां उनकी सुख सुविधाओं की व्यवस्था कराई जाएगी।
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कालिंजर दुर्ग
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डीएम ने परिवहन निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि कालिंजर थाने के पास बस स्टॉप की व्यवस्था कराएं। इसके लिए नरैनी एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव को एक एकड़ भूमि उपलब्ध कराने को कहा। यह भी निर्देश दिए कि ट्रांसपोर्टर, होटल मालिक, टूर ऑपरेटर और फोटोग्राफर एसोसिएशन आदि की बैठकें कराकर कालिंजर दुर्ग विकास की कार्ययोजना तैयार कराएं। कालिंजर मार्ग पर स्वागत बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि कालिंजर दुर्ग विकास समिति की बैठक हर हफ्ते होगी।
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कालिंजर दुर्ग
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यह दुर्ग बांदा जिले में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में विंध्य पर्वत पर स्थित खजुराहो से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है। इसको भारत के सबसे विशाल और रहस्यों से भरे दुर्ग के रूप में जाना जाता है। यहां कई प्राचीन मंदिर भी हैं। दुर्ग में खजाने को लेकर भी कई तरह के रहस्यों पर चर्चा होती रहती है।
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कालिंजर दुर्ग
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यहां के शिव मंदिर के बारे में मान्यता है कि सागर मंथन से निकले विष को पीने के बाद भगवान शिव ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। यहां लगने वाला कार्तिक पूर्णिमा का मेला दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। केंद्रीय पर्यटन विभाग के फैसले से एक ओर जहां दुर्ग के कायाकल्प की आस जगी है तो लोगों में इसको लेकर काफी उत्साह भी है।