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7800 करोड़ का घोटाला: जिसे सुप्रीमकोर्ट ने नहीं छोड़ा, वो तिकड़म भिड़ा पांच लाख देकर आ गया जेल से बाहर
Fri, 09 Jul 2021 05:21 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 09 Jul 2021 05:21 AM IST
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हीरा कारोबारी उदय देसाई
- फोटो : अमर उजाला
करीब 7800 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी उदय देसाई को भले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत न मिली हो, लेकिन वो तिकड़म भिड़ाकर जेल से बाहर आ गया। उसे पांच लाख के निजी मुचलके पर 60 दिन के लिए छोड़ा गया है। हालांकि, विशेष न्यायाधीश ने शपथपत्र लिया है कि वह देश छोड़कर नहीं जाएगा। उधर, फाइल में आदेश न होने के चलते कारपोरेट मंत्रालय की जांच विंग एसएफआईओ (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस) को गुरुवार को भी आदेश की मूल प्रति नहीं मिली। करोड़ों के घोटाले के आरोपी की जमानत में जेल अधीक्षक के अलावा जेल चिकित्सक और जिलाधिकारी की रिपोर्ट भी मददगार बनी। जेल चिकित्साधिकारी की रिपोर्ट में उदय देसाई का इलाज लखनऊ के एसजीपीजीआई के विशेषज्ञों के निर्देश पर करने की बात कही गई थी। साथ ही 65 साल की उम्र में कई गंभीर बीमारियां बताई गईं और पोस्ट कोविड के चलते विशेषज्ञों द्वारा लगातार इलाज कराने की हिदायत भी दी गई थी।
उदय देसाई, सुजय देसाई
- फोटो : amar ujala
डीएम की रिपोर्ट में कहा गया कि उदय सजायाफ्ता कैदी नहीं, विचाराधीन बंदी है और उसके मामले में हाई पॉवर कमेटी के निर्देश लागू होते हैं। हालांकि, जमानत के संबंध में फैसले का अधिकार न्यायालय को है। उदय ने जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश के सामने गंभीर बीमारी का तर्क रखा। विशेष न्यायाधीश ने परिस्थितियाें और सभी रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम जमानत मंजूर कर ली। उदय से इस बात का शपथपत्र लिया कि वह जमानत अवधि 60 दिन के दौरान कोई गैरकानूनी काम नहीं करेगा, बिना कोर्ट की अनुमति के देश नहीं छोड़ेगा और 60 दिन बाद न्यायालय में आत्मसमर्पण कर देगा।
हीरा कारोबारी उदय देसााई के यहां पड़ा था सीबीआई का छापा
- फोटो : अमर उजाला
इस आधार पर मिली जमानत
कोरोना काल में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ और हाईकोर्ट की हाई पॉवर कमेटी ने विचाराधीन बंदियों को 60 दिन के लिए शर्तों पर अंतरिम जमानत/पैंडमिक पैरोल पर रिहा करने के निर्देश जारी किए थे। इसी आधार पर जेल में बंद उदय देसाई ने जेल अधीक्षक के माध्यम से अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र कोर्ट भेजा। 22 जून को रोटेशन के तहत सुनवाई के लिए नियुक्त विशेष न्यायाधीश ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की। जेल चिकित्साधिकारी, जिलाधिकारी तथा जेल अधीक्षक की रिपोर्ट देखी। मामले को हाई पॉवर कमेटी के निर्देशों के अनुरूप मानते हुए और विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए अंतरिम जमानत दे दी।
कोरोना काल में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ और हाईकोर्ट की हाई पॉवर कमेटी ने विचाराधीन बंदियों को 60 दिन के लिए शर्तों पर अंतरिम जमानत/पैंडमिक पैरोल पर रिहा करने के निर्देश जारी किए थे। इसी आधार पर जेल में बंद उदय देसाई ने जेल अधीक्षक के माध्यम से अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र कोर्ट भेजा। 22 जून को रोटेशन के तहत सुनवाई के लिए नियुक्त विशेष न्यायाधीश ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की। जेल चिकित्साधिकारी, जिलाधिकारी तथा जेल अधीक्षक की रिपोर्ट देखी। मामले को हाई पॉवर कमेटी के निर्देशों के अनुरूप मानते हुए और विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए अंतरिम जमानत दे दी।
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उदय देसाई पर सीबीआई ने कसा था शिकंजा
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट से खारिज हो चुकीं अर्जियां
एसएफआईओ के अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा ने बताया कि कंपनी अधिनियम के तहत बिना शासकीय अधिवक्ता का पक्ष सुने जमानत प्रार्थना पत्र का निस्तारण नहीं किया जा सकता। उदय का पैरोल, अंतरिम जमानत व जमानत प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट से खारिज हो चुका है। 13 मई 2021 को भी कंपनी एक्ट के विशेष न्यायाधीश की कोर्ट में उदय ने अंतरिम जमानत अर्जी दी थी, लेकिन उसे वापस ले लिया था।
एसएफआईओ के अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा ने बताया कि कंपनी अधिनियम के तहत बिना शासकीय अधिवक्ता का पक्ष सुने जमानत प्रार्थना पत्र का निस्तारण नहीं किया जा सकता। उदय का पैरोल, अंतरिम जमानत व जमानत प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट से खारिज हो चुका है। 13 मई 2021 को भी कंपनी एक्ट के विशेष न्यायाधीश की कोर्ट में उदय ने अंतरिम जमानत अर्जी दी थी, लेकिन उसे वापस ले लिया था।
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विक्रम कोठारी, उदय देसाई
- फोटो : अमर उजाला
कोरोनाकाल में ही मामले में सहअभियुक्त और उदय के बेटे और सुजय की जमानत अर्जी प्रभारी विशेष न्यायाधीश ने खारिज कर दी थी। उदय पर गंभीर आरोप हैं। कानून के तहत उसे दस साल तक की सजा हो सकती है और लगभग 12 करोड़ रुपये का जुर्माना भी अदा करना पड़ सकता है। आदेश की सत्य प्रति मिलते ही अंतरिम जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी।