फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कहीं दिलों में नफरत, कहीं पूजी जा रही फूलन, एक डाकू के दो चेहरे, यमुनापट्टी के दो गांवों की गजब कहानी

Sun, 14 Feb 2021 09:22 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 14 Feb 2021 09:22 AM IST
विज्ञापन
40 years of Behmai incident completed, story of two villages of Yamunapatti
फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
यमुनापट्टी में बसे बेहमई गांव (कानपुर देहात) में जिस फूलन देवी को हत्यारिन माना जाता है, उसे ही नदी पार शेखपुर गुढ़ा का पुरवा गांव (कालपी) में देवी की तरह पूजा जाता है। बदले की आग में सुलग रही डकैत फूलन और उसके गैंग ने 14 फरवरी 1981 को बेहमई में ऊंची जाति के 20 लोगों को मार डाला था। कोई 12 किलोमीटर के फासले पर बसे इन गांवों में आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक माहौल बहुत कुछ बदला है। वक्त ने किसी हद तक घाव तो भर दिए, पर अदालत से फैसला नहीं होने के कारण टीस अभी भी बाकी है। सिलसिलेवार पढ़िये बेहमई कांड के आगाज से अंजाम और अब तक की आंखों देखी-कानों सुनी...


यहां तो फूलन को देवी बना दिया, मूर्ति लगाई
कालपी मुख्यालय से कोई 12 किलोमीटर दूर गुढ़ा का पुरवा गांव में बेहमई से बिल्कुल उलट दृश्य दिखेगा। यहां फूलन को देवी की तरह पूजा जाता है। फूलन के घर को लगभग स्मारक में तब्दील कर वहां उसकी संगमरमर की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है।

गांव में फूलन के गीत गूंजते हैं और उसके जन्मदिन पर उत्सव होता है। गुढ़ा का पुरवा में जन्मी फूलन देवी इस गांव के  लिए मसीहा है। लोककथाओं की तरह उसके किस्से सुनाते हुए लोग गर्व करते हैं। किसान रामसेवक ठसक से बताते हैं कि वह उसके साथ खेलते थे और उसकी तकलीफें भी नजदीक से देखीं थीं। मल्लाह बहुल यह गांव 40 साल पहले सामंती व्यवस्था का शिकार था।
40 years of Behmai incident completed, story of two villages of Yamunapatti
फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
ऊंची जाति के लोगों की लगातार प्रताड़ना से तंग आकर फूलन ने बंदूक उठाई और उन्हें सबक सिखाया। इसके बाद किसी की हिम्मत नहीं पड़ी इस गांव पर बुरी नजर डालने की। फूलन को डकैत नहीं, बागी कहिए। वह गुस्सैल थी। सांसद बनने के बाद इस गांव का विकास उसका सपना था पर उसकी हत्या के कारण पूरा नहीं हो सका।
40 years of Behmai incident completed, story of two villages of Yamunapatti
फूलन देवी (फाइल फोटो)
भतीजे मोहन ने बताया कि छह महीने पहले 10 एकलव्य सोसाइटी ने फूलन की प्रतिमा लगवाई है। घर भी पक्का हो गया। फूलन की वह वर्दी, जिसे वह डकैत जीवन के दौरान पहनती थी, बाल संवारने के लिए माथे पर बांधा जाने वाला लाल पट्टा और उसकी पायल अभी सुरक्षित है। हर साल 10 अगस्त को फूलन का जन्मदिन उत्सव होता और 25 जुलाई को पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि दी जाती है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
40 years of Behmai incident completed, story of two villages of Yamunapatti
फूलन देवी (फाइल फोटो)
फूलन पर गर्व है, जुल्मियों से आजादी दिलाई
फूलन पर इस गांव को गर्व है। उसने न जाने कितनी लड़कियों को बर्बाद होने से बचाया और जुल्म ढाने वालों को सबक सिखाया। कच्ची उम्र में शादी, फिर डकैतों के सितम ने उसे बागी बना दिया। बेहमई कांड के बाद न केवल इस गांव को जुल्मियों से आजादी मिली, बल्कि आसपास के सैकड़ों गांवों ने राहत की सांस ली। - सिद्धनाथ, गुढ़ा का पुरवा

सियासी गणित में उलझता रहा इंसाफ
फूलन तो मारी गई पर अभी भी कुछ गुनहगार बचे हैं। उम्मीद है अदालत जल्द ही फैसला सुनाएगी और दोषियों को सजा जरूर मिलेगी। फरार डकैतों को भी नहीं दबोचा गया है। दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति होती और सियासी गणित न लगाई जाती तो फूलन के जिंदा रहते फैसला हो जाता। टीस तो दिलों में है ही। अच्छा होकि कानून सजा दे। - जयवीर सिंह, निवर्तमान ग्राम प्रधान (बेहमई)
 
विज्ञापन
40 years of Behmai incident completed, story of two villages of Yamunapatti
बेहमई गांव में नरसंहार कांड में मारे गए लोगों की याद में बनवाये गये शहीद स्मारक में कराई गई सफाई - फोटो : अमर उजाला
तारीख दर तारीख
- 14 फरवरी 1981 को बेहमई में 20 लोगों की हत्या का आरोप फूलन देवी और उसके गैंग पर लगा।
- 14 फरवरी 1981 को ही गांव के राजाराम ने फूलन, पोसा, विश्वनाथ सहित 35-40 डकैतों पर सिकंदरा थाने (तब इलाकाई थाना था) में रिपोर्ट दर्ज करवाई।
- 12 फरवरी 1983 को फूलन ने गैंग सहित मध्यप्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण किया।
- 11 साल बाद केस की सुनवाई शुरू हुई। गवाहों की सूची, चश्मदीद, घटनास्थल का नक्शा और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।
- 31 साल बाद आरोप तय हुए और 32 साल में गवाही पूरी हुई। 43 में 15 गवाहों के बयान कोर्ट में हुए। कई गवाहों की भी मौत।
- 15 अभियुक्तों (फूलन सहित) की मौत हो चुकी है। चार जिंदा हैं। दो अभी भी फरार हैं और बाकी जमानत पर हैं।
- 2019 दिसंबर में फैसला आना था, लेकिन मूल केस डायरी गायब होने के कारण घड़ी टल गई। इस बीच करोना के कारण सुनवाई टलती गई।
- 14 दिसंबर 2020 को वादी 85 साल के राजाराम की भी मौत हो गई।
- 2 फरवरी 2021 को तारीख पड़ी पर कोई खास प्रगति नहीं। अब 17 फरवरी को फिर सुनवाई है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed