बांदा जिले में ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग के कोटि तीर्थ सरोवर की दीवार से ऐतिहासिक धरोहर मिली है। शिवलिंग, गणेश, भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी समेत अनेक देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां मलबे से निकली हैं। पुरातत्व विभाग मूर्तियों की सफाई कराकर इन्हें सहेजने में जुटा है।
UP News: कालिंजर दुर्ग में मिलीं दसवीं शताब्दी की मूर्तियां, सहेजने में जुटा पुरातत्व विभाग, देखें तस्वीरें
शिवलिंग को छोड़कर अधिकतर मूर्तियां खंडित
इस दौरान उसमें प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां निकल आईं। कुछ पत्थरों पर देवी-देवताओं की नक्काशी है। इसमें भगवान विष्णु, गणेश, लक्ष्मी जी, पार्वती जी की प्रसन्न मुद्रा वाली भी मूर्तियां हैं। शिवलिंग को छोड़कर अधिकतर मूर्तियां खंडित हैं।
राजा अमान सिंह के महल में रखी जाएंगी मूर्तियां
मूर्तियों को मलबे से निकालकर एक्साइड पुरातत्व विभाग के कर्मी वहीं दीवार के किनारे रख रहे हैं। अभी नंबरिंग का कार्य नहीं हुआ हैं। कर्मियों का कहना है कि गोट्टी तालाब के पास राजा अमान सिंह का महल है। पहले निकली मूर्तियां उसी में रखी गई हैं। इन्हें भी उसी में रखा जाएगा।
दुर्ग में पहले भी मिली हैं कलाकृतियां
कालिंजर दुर्ग के इतिहास के जानकार समाजसेवी विवेक शुक्ला ने बताया 1986 में दुर्ग तक जाने के लिए रोड बनाई जा रही थी। तब भी खोदाई के दौरान इसी तरह से मूर्तियां निकलीं थी। उन्हें पुरातत्व विभाग ने संरक्षित कर राजा अमान सिंह महल में नंबर डालकर रखवा दिया था।
पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है दुर्ग
दुर्ग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तब 282 केएफ नंबर से 305 तक की मूर्तियां और तोप के गोले निकले थे। उनको पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में ले लिया था। इसके अलावा 1960 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कालिंजर दुर्ग को अपने संरक्षण में लिया था।