सेना के जवान अभिषेक यादव का पार्थिव शरीर शुक्रवार को दोपहर 12 बजे क्षेत्र के वृंदावन गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धांजलि देने के बाद पार्थिव शरीर सैदपुर के जौहरगंज घाट ले जाया गया, जहां पिता रामजन्म यादव ने पुत्र को मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।
जवान का पार्थिव शरीर सेना के वाहन से घर पहुंचा तो परिजन बिलख पड़े। अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग एकत्र हो गए थे। लोगों द्वारा लगाए जा रहे अभिषेक यादव अमर रहे और भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा, अभिषेक तेरा नाम रहेगा के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मां समौता देवी, पिता रामजन्म यादव, भाई-बहनों सहित परिवार के लोग बिलखते रहे। इस दौरान पुलिस भीड़ को नियंत्रण में करने को लेकर हलाकान रही। जखनिया के एसडीएम सूरज यादव और नायब तहसीलदार के नेतृत्व में मौजूद बहरियाबाद, सादात, भुड़कुड़ा और शादियाबाद की पुलिस मौजूद रही। करीब दो घंटे बाद जवान का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए सैदपुर के जौहरगंज घाट ले जाया गया। वहां पिता रामजन्म यादव ने मुखाग्नि दी। देखें अगली स्लाइड्स...।
इससे पूर्व सैदपुर की सीमा से सादात नगर में पार्थिव शरीर पहुंचा तो हजारों की संख्या में लोग चार पहिया, दो पहिया वाहनों के साथ चल रहे थे। शव यात्रा लगभग छह किमी लंबी थी। नगर के रघुवंश चौराहा, मजुई चौराहा, हुरमुजपुर गांव, बहादुरपुर तिराहे, मझौली गांव सहित अन्य गांवों के सैकड़ों लोगों ने जगह-जगह पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किया।
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आर्मी जवान अभिषेक यादव (23)
- फोटो : अमर उजाला
सेना की ओर से दी गई मात्र 13 हजार की मदद
सादात। सेना के जवान अभिषेक यादव के अंतिम संस्कार के लिए सेना द्वारा तेरह हजार रुपये की सहायता राशि दी गई थी। शव के साथ आए सेना के जवान राजेंद्र ने यह धनराशि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रमेश यादव के सामने अभिषेक के बड़े भाई हरिकेश यादव और पिता रामजन्म यादव को उपलब्ध कराई।
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रोडवेज की बसों सहित कई वाहनों में ग्रामीणों ने की तोड़फोड़
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इसके अलावा सेना और जिला प्रशासन की तरफ से कोई आर्थिक सहायता देने की घोषणा नहीं की गई। पिता रामजन्म यादव ने बताया कि सेना के अधिकारियों ने भी हम लोगों को कुछ नहीं बताया।
आर्डिनेंस में तैनात थे अभिषेक यादव
सेना के जवान अभिषेक यादव के पार्थिव शरीर को लेकर साथ आए सेना के हवलदार राजेंद्र ने बताया कि अभिषेक आर्डिनेंस में कार्यरत थे। वह असम के मीसामारी में तैनात थे। कुछ दिनों से वह सैन्य ड्यूटी में पहाड़ी पर गए थे। घटना के बारे में पूछे जाने पर हवलदार राजेंद्र ने कोई भी जानकारी देने से साफ इंकार कर दिया।