गाजीपुर में प्रारंभिक इलाज के बाद सोनम रघुवंशी सुबह पांच बजे सखी-वन स्टॉप सेंटर ले जाई गई। जहां वह 14 घंटे तक रही। इस दौरान पहले तो थकान के कारण सो गई लेकिन सुबह ही उठ गई। सूत्रों की मानें तो वह पूरे दिन गुमशुम रही। कभी लेटती तो कभी बैठती। नजदीक आने वालों से एक ही गुहार लगाती, मुझे भाई से बात करनी है, करा दीजिए।
पुलिस इलाज के बाद उसे पुलिस सखी वन स्टाप सेंटर लेकर गई। जहां सोनम बहुत थकान के कारण सो गई। सुबह करीब आठ बजे सीओ सिटी शेखर सेंगर और प्रोवेशन विभाग के अधिकारी पहुंचे। स्टाफ के लोगों ने उसे नाश्ता करने के लिए कहा, तो उसने मना कर दिया। हालांकि बाद में सिर्फ चाय और बिस्कुट लिया।
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गाजीपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार कराती सोनम रघुवंशी
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उसके बाद वह फिर सो गई। सोनम के शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं हैं। वह बार-बार एक ही बात कहती। मुझे भाई से बात करनी है, बात करा दीजिए। शाम करीब पांच मेघालय पुलिस स्थानीय पुलिस के साथ मौके पर पहुंची। इसके बाद सोनम को लेकर पुलिस मेडिकल के लिए सात बजे बाहर आई। पुलिस मेडिकल कराने के बाद उसे ले गई।
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गाजीपुर में देररात ढाबे पर बैठी सोनम रघुरवंशी
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गाजीपुर तक कैसे पहुंची सोनम रघुवंशी
सोनम रघुवंशी गाजीपुर तक कैसे पहुंची यह अभी सवाल बन हुआ है। हालांकि इसका जवाब वह मेघालय पुलिस को देगी, जो देर रात सोनम को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर मेघालय के लिए रवाना हो गई। सोनम मेघालय से करीब 1200 किमी का सफर कर गाजीपुर पहुंची थी।
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Sonam raghuwanshi
- फोटो : संवाद
वह एक महिला पुलिस के पूछने पर बस इतना ही बताई कि उसे कुछ पता नहीं। हालांकि लोग इसे वाराणसी से भी जोड़कर देख रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक हो सकता है सोनम बिहार होते हुए गाजीपुर की सीमा में आई हो और वाराणसी की तरफ जा रही हो।
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मेडिकल के बादल सोनम को ले जाती पुलिस
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वहीं, ढाबा जिस लेन पर स्थित है उस पर दूर-दूर तक कट नहीं है। ढाबे से नंदगंज की दूरी चार किमी, वाराणसी की 68 और प्रयागराज की दूरी 222 किमी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि वह किसी किसी वाहन से यहां आई। कुछ लोग यह भी कयास लगा रहे थे कि सोनम वाराणसी की तरफ से आई थी।