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नदियों, तालाबों और सरोवरों के किनारे पहुंचीं व्रती महिलाएं, अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य
Sat, 02 Nov 2019 06:42 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sat, 02 Nov 2019 06:42 PM IST
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गंगा तट पर छठ पूजा करतीं व्रती महिलाएं एवं जुटी भीड़।।
- फोटो : अमर उजाला
लोक आस्था का महापर्व छठ शुक्रवार को खरना के साथ शुरू हो गया। आज शनिवार को व्रती महिलाएं छठपूजा के लिए विभिन्न नदियों, तालाबों और सरोवरों के किनारे पहुंचीं। जहां वह विधि विधान से पूजा के बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दीं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
सूर्य को अर्घ्य देने के लिए आस्था का रेला गंगा घाट और सरोवर के किनारे उमड़ पड़ा।
- फोटो : अमर उजाला
कुछ महिला और पुरुष आस्था के अनुसार घुटनों के बल चलते हुए नदियों, तालाबों और सरोवरों के किनारे पहुंचे। वाराणसी में इससे पहले छठ मइया के स्वागत के लिए घरों में रंगोली बनाई गई। लोगों ने रंगीन झालरों से घर आंगन को सजाया। सूर्यभक्ति में सराबोर व्रतियों ने गोधूली बेला में प्रसाद बनाकर खरना किया।
छठ पूजा करतीं व्रती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे तक का अखंड निर्जला उपवास शुरू हो गया। शुक्रवार को गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में व्रतियों ने अपनी वेदियों पर दीपदान किया। जिसके बाद व्रती स्नान कर मिट्टी के बने चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर गुड़ में बनी खीर और रोटी बनाकर भगवान भास्कर की पूजा कर भोग लगाया।
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सुरक्षा के मद्देनजर मौजूद पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को व्रती महिलाओं ने डूबते सूरज को पहला अर्घ्य दिया। दोपहर से ही राजघाट, खिड़किया घाट, प्रह्लाद घाट, गायघाट, गोलाघाट, ब्रह्मा घाट, पंचगंगा घाट पर व्रर्ती महिलाओं और आस्थावानों की भीड़ लगी हुई थी। शाम के वक्त महिलाओं ने भगवान भास्कर को गंगा में खड़े होकर अर्घ्य देकर अपने परिवार के कल्याण की कामना किया।
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दशाश्वमेघ घाट पर महिला अपने पुत्र के साथ अर्घ्य देती हुई ।
- फोटो : अमर उजाला
वहीं शहर के कुंड और तालाबों पर भी डाला छठ के महापर्व पर डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया गया। लाट भैरव पोखरा, ईश्वरगंगी पोखरा और पियरिया पोखरा भी छठ पूजा के लिए आस्थावानों की भीड़ लगी हुई थी। अर्घ्य देने के साथ ही व्रती महिलाओं ने छठ माता की स्तुति और गीत गाए। गंगा किनारे देर शाम तक लोग अपने परिवार के साथ पूजन अर्चन कर रहे थे।