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सत्ता का संग्राम: कभी वेदों के अध्ययन का केंद्र रहा बदायूं, तो कभी गंगा के लिए भगीरथ ने किया तप, गौरवशाली इतिहास को भूल गए लोग

Mon, 15 Nov 2021 04:04 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बदायूं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बदायूं Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 15 Nov 2021 04:04 PM IST
सार

युवाओं ने राजनीतिक मुद्दों से इतर बदायूं को उसके गौरवशाली इतिहास की प्रसिद्धी वापस लौटाने को लेकर जोर दिया। उन्होंने इतिहास के ऐसे पन्ने पलट दिए जिनपर सदियों से धूल की परत चढ़ गई थी।

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Amar Ujala Chunav Rath Satta Ka Sangram in Budaun youth remembers proud history of district
चुनावी रथ में युवाओं से हो रही बातचीत - फोटो : अमर उजाला
यूपी विधानसभा चुनाव की विशेष कवरेज के लिए निकला अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' सोमवार को बदायूं जिले पहुंचा। अन्य जिलों की तरह सड़कों, कूड़े-कचरे, बिजली, शिक्षा, विकास और सुरक्षा जैसे मु्द्दों पर तो बातचीत हुई ही, लेकिन दोपहर दो बजे युवाओं के साथ चर्चा के दौरान एक ऐसा मुद्दा उठा जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। युवाओं ने राजनीतिक मुद्दों से इतर बदायूं को उसके गौरवशाली इतिहास की प्रसिद्धी वापस लौटाने को लेकर जोर दिया। उन्होंने इतिहास के ऐसे पन्ने पलट दिए जिनपर सदियों से धूल की परत चढ़ गई थी। ऐसे में हमें लगा कि आपको भी बदायूं की ऐतिहासिक प्रतिष्ठा के बारे में जानना चाहिए। 
Amar Ujala Chunav Rath Satta Ka Sangram in Budaun youth remembers proud history of district
चुनावी रथ में युवाओं से हो रही बातचीत - फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि बदायूं पूर्व में वेदों की शिक्षा का केंद्र था। यहां वेदों पर गहरे अध्ययन किए गए थे, जिसके कारण इसका नाम 'वेदा मऊ' था। बदायूं में स्थित सूरजकुंड प्राचीनकाल का वह गुरुकुल है जहां वेदों की शिक्षा दी जाती थी। हालांकि बाद में यहां के शासक हुए राजा महिपाल ने उसका नाम बदलकर 'बदाऊ' कर दिया था, जो आगे चलकर बदायूं हो गया।


 
Amar Ujala Chunav Rath Satta Ka Sangram in Budaun youth remembers proud history of district
चुनावी रथ में युवाओं से हो रही बातचीत - फोटो : अमर उजाला
इसके नाम को लेकर एक किंवदंती यह भी है कि बदायूं शहर की स्थापना राजा बुद्ध के द्वारा की गई थी। इसलिए एक समय में इसका नाम 'बुद्ध मऊ' भी था।
 
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Amar Ujala Chunav Rath Satta Ka Sangram in Budaun youth remembers proud history of district
चुनावी रथ में युवाओं से हो रही बातचीत - फोटो : अमर उजाला
बदायूं में नवाब इखलास खां का रौजा काफी प्रसिद्ध है। निर्माण के दौरान इसे ताजमहल की रूप रेखा देने की कोशिश की गई थी, जिसके कारण यह काला ताज भी कहलाता है। गुंबद और चारों कोनों में मीनारनुमा मकबरे में वास्तविक पांच कब्रें हैं। बताया जाता है कि यह इखलास खां और उनके रिश्तेदारों की कब्र है। हालांकि इसके अंदर जाने का रास्ता फिलहाल बंद कर दिया गया है।
 
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Amar Ujala Chunav Rath Satta Ka Sangram in Budaun youth remembers proud history of district
चुनावी रथ में युवाओं से हो रही बातचीत - फोटो : अमर उजाला
बदायूं की एक कहानी यह भी है कि गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भगीरथ ने वर्षों तक यहां तपस्या की थी। यहां बहने वाली बूढ़ी गंगा के किनारे एक प्राचीन टीले पर अनूठी गुफा है जिसे भगीरथ गुफा के नाम से जाना जाता है। कहा तो यह भी जाता है कि यह दैत्यगुरु शुक्राचार्य की तपोभूमि भी रहा है। यहां शुक्राचार्य ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए 80 हजार वर्षों तक तप किया था।
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