हरिद्वार-काशीपुर नेशनल हाईवे पर चालक को लगी नींद की झपकी की वजह से पांच जिंदगी खत्म हो गईं। तीर्थ यात्रा पर हरिद्वार और ऋषिकेश आए आठों श्रद्धालुओं में पांच की मौत होने से यह यात्रा इनके लिए अंतिम यात्रा साबित हो गई। उधर, तीन घायल जिंदगी अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि एक की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
फर्रुखाबाद के कस्बा राजेपुरा से 29 जुलाई की शाम आठ युवकों का जत्था रामगंगा के पांचाल घाट से जल लेकर नीलकंठ के लिए चला था। ये श्रद्धालु नीलकंठ और हरिद्वार होते हुए लौट रहे थे। रात में करीब ढाई बजे ये हरिद्वार से घर के लिए निकल पडे़। सुबह चार बजे मंडावली के पास गांव मुस्सेपुर के निकट पहुंचे तो बरेली डिपो की बस और कार में टक्कर हो गई।
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हादसे में क्षतिग्रस्त वाहन
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पुलिस के मुताबिक, कार चालक को नींद की झपकी आने से यह हादसा हुआ। कार की तेज रफ्तार भी हादसे की वजह बनी।
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विलाप करते परिजन।
- फोटो : amar ujala
इस हादसे में कार चालक सच्चिदानंद की भी मौत हो गई। चचेरे भाइयों धर्मेंद्र यादव और अशोक उर्फ शेरा की जान भी नहीं बच सकी। धर्मेंद्र यादव एक निजी अस्पताल में काम करता था, जबकि अशोक बैंक कर्मी था। दो चचेरे भाइयों, कार चालक के अलावा मंजीत और पवन की भी मौत हुई है। मंजीत के पिता रमेश की भी सड़क हादसे में दो साल पहले जान चली गई थी।
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हादसे में क्षतिग्रस्त हुई कार।
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बताया गया कि हादसे में पवन का भांजा सुमित घायल हैं। पवन कस्बे में ही दुकान करता था। इस जत्थे में सात युवक राजेपुरा के रहने वाले हैं, जबकि आठवां युवक अमित बख्शपुर थाना राजेपुर का रहने वाला है। अमित बिजनौर के ही निजी अस्पताल में भर्ती है। जबकि सुमित और रोहित को मेरठ के लिए रेफर कर दिया गया था।
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बस और कार की हुई थी टक्कर।
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डिवाइडर पर चढ़ा दी बस, फिर भी हो गया हादसा
पुलिस के अनुसार मौके पर जो हालात देखने को मिले, उससे जाहिर होता है कि बस चालक ने सामने कार को आता देख उसे बचाने का खूब प्रयास किया होगा। क्योंकि नजीबाबाद से हरिद्वार की ओर जा रही यह बस डिवाइडर पर चढ़ी मिली है। जबकि हरिद्वार से आ रही कार विपरीत दिशा में पहुंच गई। शायद इसी वजह से बस और कार की टक्कर हो गई।