बिजनौर में सड़कों पर आवारा कुत्तों के आतंक से ही नहीं बल्कि पालतू कुत्तों से भी लोगों को डर लगा रहता है। दो दिन पहले एक प्रधान के पालतू जर्मन शेफर्ड ने हीमपुर दीपा के प्रभारी निरीक्षक को घायल किया, जबकि एक आवारा कुत्ते ने हाल ही में पूर्व प्रधान पर हमला कर दिया था।
हीमपुर दीपा क्षेत्र के गांव रतनपुर खुर्द के पूर्व प्रधान भानु प्रकाश शर्मा को कुछ दिनों पहले आवारा कुत्ते ने पैर में काट कर जख्मी कर दिया था। वहीं अजीपुरा जट, हीमपुर दीपा में भी आवारा कुत्तों के काटने की कई घटनाएं हो चुकी। जिसके चलते क्षेत्र वासियों ने प्रशासन से आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग की है। सिर्फ आम आदमी ही नहीं बल्कि पुलिस भी आवारा कुत्तों से परेशान है। क्योंकि थाना प्रभारी निरीक्षक हीमपुर दीपा को जर्मन शेफर्ड ने हमला कर घायल कर दिया।
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इंस्पेक्टर राधेश्याम।
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प्रभारी निरीक्षक अजीत रोरिया अपने क्षेत्र में गश्त पर थे, इसी दौरान वह ग्राम प्रधान रतनपुर खुर्द के प्रधान पति दुष्यंत कुमार के आवास पर रुके, जहां जर्मन शेफर्ड कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया। घायल अवस्था में उनको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्याऊ चांदपुर ले जाया गया।
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नजीबाबाद कोतवाल के हाथ की हुई सर्जरी
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बता दें कि नजीबाबाद कोतवाल राधेश्याम पर भी एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था, जिनका मेरठ के अस्पताल में अभी तक इलाज चल रहा है।
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कुत्तों का आतंक
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मांस खाने वाले कुत्ते हो रहे ज्यादा हिंसक
ऐसे गांव या कस्बे, जहां लोग मांस का सेवन ज्यादा करते हैं और मांस के अवशेष को खुले में या कूड़ें में फेंक दिया जाता है। ऐसी जगहों पर कुत्ते मांस के अवशेष का सेवन करते हैं। मांस का सेवन करने वाले कुत्ते ज्यादा हिंसक हो रहे हैं। इसके अलावा मीट की दुकानों के आस पास भी कुत्तों के झुंड मंडराते रहते हैं। वहीं कुछ लोग अपने पालतू कुत्तों को भी मीट खिलाते हैं, जिससे कुत्तों के हिंसक होने की संभावना ज्यादा रहती है।
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नजीबाबाद कोतवाल राधेश्याम
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खतरनाक कुत्तों को पालने से नहीं कतरा रहे लोग
यूं तो विदेशों में कुत्तों की कई नस्लों को पालने पर प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन अपने यहां स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिले में भी लोग केवल शान दिखाने के लिए खतरनाक नस्ल के कुत्तों जैसे पिटबुल, रॉटवीलर, जर्मन शेफर्ड, डॉबरमैन, वुलडॉग को पाल रहे हैं। ये मालिकों के लिए तो खतरा बनते ही हैं और पड़ोसी भी परेशान रहते हैं। जब मालिक इन कुत्तों को संभाल नहीं पाते तो सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। उधर, देशी नस्ल के कुत्ते अब केवल सड़कों पर पड़े रहने तक ही सीमित हो गए हैं, इन्हें पालने से लोग परहेज करने लगे हैं।