उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद बाढ़ की आशंका के चलते नदियों के किनारे अलर्ट कर दिया गया है। बिजनौर में गंगा किनारे बसे दो दर्जन से अधिक गांवों में किसानों को खेतों से घर बुला लिया गया है। गांव इच्छावाला से ज्यादातर किसान पलायन कर गए हैं।
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चांदपुर में पानी आने की आशंका को लेकर ट्रैक्टर पर सामान ले जाते पलेज लगाने वाले किसान। संवाद
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उन्होंने मुजफ्फरनगर और मंडावर में सुरक्षित स्थानों पर शरण ली हैं। किसानों को किसी भी सूरत में गंगा व अन्य नदियों के किनारे नहीं जाने के लिए कहा गया है। पानी बढ़ने की आशंका के चलते बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं।
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लोगों में दहशत
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चमोली में बांध टूटने से गंगा तट के गांवों में किसानों में हड़कंप मचा हुआ है। किसानों के खेत गंगा की धारा के दूसरी ओर भी हैं। पुलिसकर्मियों और लेखपालों को गांवों में दौड़ा दिया गया। मंदिरों, मस्जिदों से एनाउंसमेंट कराकर किसानों को तुरंत खेतों से घर बुलाया गया है।
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मौके पर पहुंचे अधिकारी
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गंगा की धारा के दूसरी ओर बसे गांव इच्छावाला को लगभग खाली करा दिया गया है। गांव की महिलाएं, बच्चे व बूढ़ों ने मुजफ्फरनगर व मंडावर में शरण ली हैं। गंगा की धारा के दूसरी ओर उत्तराखंड की ओर बसे जिले के गांवों रामसहायवाला व हिम्मतपुर बेला के गांव वालों को भी सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा गया है। पलेज लगाने वाले किसान भी अपना सामान भरकर गांवों में आ गए हैं।
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लोगों में दहशत
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चाहड़वाला के सामने चल रही जोड़े वाली नाव से किसानों को गांवों में लाया गया और सभी किसानों के लौटने पर जोड़े वाली नाव को बंद कर दिया गया। पुलिस के एनाउंसमेंट के बाद गंगा की धारा के दूसरी ओर खेती कर रहे किसानों में अफरा तफरी मच गई। किसान एकदम घर की ओर दौड़े तो डैबलगढ़ में बने पीपे के पुल पर किसानों की भारी भीड़ जमा हो गई। किसानों को सावधानी से पुल से गांव की ओर लाया गया।