पीलीभीत में राजकीय मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल छात्रा कशिश पटेल (22) की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्तार आरोपी सागर सिंह ने कबूल किया है कि शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने से वह नाराज था। उसने चार दिनों तक हत्या की साजिश रची। पुलिस पूछताछ में कानपुर निवासी सागर ने वह एक हफ्ते से बरेली निवासी कशिश को मनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह उसे नजरअंदाज कर रही थी।
इससे गुस्सा होकर वो मौके की तलाश में जुट गया। मंगलवार सुबह सीटी स्कैन रूम में छात्रा को अकेला पाकर सागर ने आखिरी बार उसे मनाने की कोशिश की, लेकिन कशिश ने बात करने से भी मना कर दिया और शोर मचाने लगी। तैश में आकर सागर ने कशिश के सीने और पेट पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए।
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जिला अस्पताल के सीटी स्कैन कक्ष में कशिश पटेल की हत्या
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चार दिन से नहीं सोया
पुलिस की पूछताछ में सागर ने कबूल किया कि वह चार दिनों से लगातार उसका पीछा कर रहा था। इन चार दिनों में वह एक पल के लिए भी नहीं सोया, बस उसी के बारे में सोचता रहा। फिर तय कर लिया था कि अगर वह उसकी नहीं हुई तो उसे किसी और की भी नहीं होने देगा।
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कशिश पटेल की हत्या के बाद जिला अस्पताल में जांच के लिए पहुंची पुलिस
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अस्पताल परिसर में हजारों की भीड़, न पूछताछ न कोई जांच के इंतजाम
पीलीभीत में पैरामेडिकल छात्रा कशिश की हत्या के बाद जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच बुधवार को हालात चौंकाने वाले मिले। घटना के महज 24 घंटे बाद ही अस्पताल में सुरक्षा फिर पुराने ढर्रे पर लौटती दिखी। मुख्य प्रवेश द्वारों के अलावा अन्य द्वार से मरीज और तीमारदारों की भीड़ आती जाती रही, लेकिन जांच के नाम पर न तो कोई पूछताछ, न ही कोई चेकिंग की गई।
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जिला अस्पताल पार्क में धरना देते छात्र-छात्राएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में सुरक्षा के कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही सामने आई। हत्या के बाद माना जा रहा था कि प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद करेगा। बुधवार को स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आई। अस्पताल परिसर का जायजा लिया तो सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता तक सीमित दिखाई दी।
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छात्रा कशिश पटेल की हत्या के बाद अस्पताल में पुलिस और अन्य स्टाफ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुरक्षाकर्मी अपनी ड्यूटी पर जरूर मौजूद थे, लेकिन कहीं भी ऐसी सतर्कता नहीं दिखी, जिससे लगे कि एक दिन पहले हुई बड़ी वारदात से कोई सबक लिया गया है। अस्पताल के विभिन्न प्रवेश मार्गों से लोग बिना किसी रोक-टोक के अंदर आते-जाते रहे। न बैग की जांच हुई, न एप्रन पहने छात्रों की तलाशी ली गई और न ही संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी गई। सुरक्षा कर्मी सिर्फ मरीजों की अधिक मौजूदगी वाले स्थानों पर उन्हें कतार में लगाते दिखाई दिए।