लखीमपुर खीरी जिले में ऐसा अनोखा शिव मंदिर है, जहां भगवान भोलेनाथ मेंढक की पीठ पर विराजमान हैं। ओयल कस्बे में मंडूक तंत्र और श्रीयंत्र के आधार पर निर्मित यह शिव मंदिर अपनी अनूठी और अद्भुत वास्तु संरचना के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर का निर्माण ओयल स्टेट के तत्कालीन शासकों ने कराया था। मंदिर की वास्तु संरचना अपनी विशेष शैली के कारण लोगों का मनमोह लेती है।
अनोखा शिव मंदिर: यहां मेंढक की पीठ पर विराजमान हैं भगवान भोलेनाथ, सुख-समृद्धि का है प्रतीक, पढ़ें रोचक इतिहास
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इस शिव मंदिर की वास्तु परिकल्पना कपिला के एक महान तांत्रिक ने की थी। मुख्य मंदिर एक विशालकाय मेंढक की पीठ पर बना हुआ है। मेंढक का मुंह उत्तर की ओर है। पिछला हिस्सा दक्षिण की ओर और दो पैर पूर्व दिशा में और दो पैर पश्चिम की दिशा में दिखाई देते हैं। शिवलिंग पर अर्पित किया जाने वाला जल नलिकाओं के जरिए मेंढक के मुंह से निकलता है।
मुख्य मंदिर के शिखर पर कलश के अलावा गायों का झुंड, अर्धचंद्र है। मंदिर की दीवारों पर योगी-योगिनियों के चित्र बने हुए हैं। मंदिर परिसर में चारों कोनों पर चार और मंदिर बने हैं लेकिन उसमें कोई देव प्रतिमा स्थापित नहीं है। मंदिर परिसर की पूरी संरचना एक पंचायत जैसी प्रतीत होती है। मंदिर के चबूतरे से होकर पश्चिम की ओर एक छोटा द्वार भी है। बताते हैं कि यह द्वार राजपरिवार के लोगों के लिए था, यहां से राजमहल तक सुरंग मार्ग था जो अब बंद हो गया है। मंदिर में मुख्य द्वार उत्तर की दिशा में हैं।