बरेली में गणेश चतुर्थी पर स्थापना के लिए बाजार में गणेश जी की मूर्तियों बिक्री शुरू हो गई है। गजानन के स्वागत के लिए भक्त भी उत्साहित हैं। बड़ी संख्या में लोग हर रोज प्रतिमाएं खरीदने के लिए बाजार में पहुंच रहे हैं। इस विशेष अवसर पर बाजार भी भगवान गणेश की प्रतिमाओं से सुसज्जित है। मूर्तिकार अपनी उत्कृष्ट कला के माध्यम से प्रतिमाओं को रंगों से सजीव एवं आकर्षक बना रहे हैं। इस साल बाजार में रामलला की छवि वाली गणेश प्रतिमाओं की मांग अधिक है। अयोध्या के राम मंदिर में प्रभु रामलला की स्थापना के अवसर पर, इस बार विशेष रूप से गणेश प्रतिमाएं राम मंदिर की पृष्ठभूमि में उकेरी गई हैं। इनमें रामलला और गजानन की जुगलबंदी दिख रही है।
Ganesh Chaturthi 2024: बाजार में धूम मचा रही रामलला और गजानन की जुगलबंदी, भक्तों को भा रहीं ये मूर्तियां
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मुंबई, कोलकाता से आईं ईको फ्रेंडली मूर्तियां
मुंबई और कोलकाता से आईं भगवान गणेश की मूर्तियां विशेष रूप से कच्ची मिट्टी से निर्मित हैं, जो पूरी तरह से पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं और जल्द ही पानी में घुल जाती हैं। पर्यावरण हितैषी होने के कारण लोगों इन्हें खूब पसंद कर रहे हैं।
पीओपी की तुलना में मिट्टी की मूर्तियों की मांग ज्यादा
मूर्ति कारोबारी ऋषभ देवल ने बताया कि बप्पा की ईको फ्रेंडली मूर्तियां मुंबई और कोलकाता से मंगवाई जाती हैं, जो पर्यावरण को सुरक्षित रखती हैं और प्रदूषण नहीं फैलाती हैं। मूर्ति कारोबारी शोभित ने बताया कि मिट्टी की मूर्तियां पूरी तरह से पानी में घुल जाती हैं, जिस वजह से इनकी मांग पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से बनी मूर्तियों की तुलना में ज्यादा रहती है।
डमरू, नंदी व मोर पर विराजमान हुए विघ्नहर्ता
इस वर्ष, भगवान गणेश ने अपने पारंपरिक वाहन मूषक के अलावा डमरू, नंदी और मोर पर भी विराजमान होकर सबका ध्यान केंद्रित किया। यह मूर्तियां श्रद्धा, आस्था के साथ-साथ कला और संस्कृति का भी अनूठा मेल हैं। मुंबई के प्रसिद्ध लाल बाग के राजा की मूर्ति भक्तों में विशेष रूप से आस्था का केंद्र बनी हैं।
भगवान गणेश के बालस्वरूप की छवि की मूर्ति की भी भारी मांग रही। आकार के हिसाब से ये मूर्तियां बाजार में विभिन्न दामों, रंगों व डिजाइनों में उपलब्ध रहीं। 100 से लेकर दस हजार रुपये तक की कीमत में मूर्तियां उपलब्ध हैं।