बरेली में शनिवार सुबह पीलीभीत बाइपास पर प्लॉट पर कब्जे को लेकर हुए बवाल ने शहर की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि फायरिंग के दौरान पुलिस के आला अफसर कहां थे? मुखबिर तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? स्मार्ट सिटी के तहत शहर के चप्पे-चप्पे की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरों को क्या हो गया था? एक फोन कॉल पर चंद मिनटों में पहुंचने का दावा करने वाली पुलिस की क्विक रिस्पांस टीमें कहां थीं?
Bareilly Firing Case: होटलों में ठहरे थे हमलावर... गोलियों से दहला शहर; लोग बोले- ऐसी वारदात पहली बार देखी
ताज्जुब तो ये है कि बेखौफ बदमाश एक घंटे तक फायरिंग व बवाल करते रहे और पुलिस अफसर गायब रहे। स्थानीय पुलिस अगर मिली हुई थी तो बाकी तंत्र कैसे बेखबर रहा? लोगों का कहना है कि घटना के पीछे पुलिस, नेता व माफिया का गठजोड़ है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो सुबह पांच बजे दर्जनों लोग दो बुलडोजर लेकर आ गए थे। इसके बाद मार्बल दुकान स्वामी आदित्य उपाध्याय के चौकीदार को पीटा, फायरिंग की।
कई होटलों में ठहरे थे हमलावर, एक सील
पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि हमलावर कई होटलों में ठहरे थे। स्टार होटल के अलावा मुंशीनगर के होटल सीके वैली में केपी यादव, शैलेश व अर्जुन की आईडी लगाकर कमरा नंबर 206 से लेकर 210 तक बुक किए गए थे। इनमें 30 लोग ठहराए गए थे। इसकी फुटेज पुलिस के हाथ लग चुकी है। पुलिस ने रविवार को स्टार होटल में दबिश दी, लेकिन होटल बंद मिला। पुलिस ने होटल को सील कर दिया है।
शनिवार को पुलिस की मौजूदगी में सुबह छह बजे प्लॉट से कब्जा हटवाया जा रहा था। मौके पर पुलिस मौजूद थी। पुलिस की मौजूदगी में दो बुलडोजर से मार्बल तोड़े जा रहे थे। सवाल तो यह भी उठता है कि अगर पुलिस कब्जा हटवाने गई भी थी तो लाखों रुपये के मार्बल तुड़वाने की इजाजत उसे किसने दी? पुलिस की मौजूदगी में पत्थरों को बुलडोजर से तोड़ने का वीडियो तक वायरल हो रहा है।