अवैध धर्मांतरण के आरोप में एटीएस की ओर से गिरफ्तार किए गए जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर अपने गुर्गों को प्रशिक्षण दिलाने के लिए दुबई से कट्टर मौलाना बुलाता था। उनके साथ नेपाल में सक्रिय दावत-ए-इस्लामी की टीम भी होती थी।
प्रशिक्षण के लिए ही उसने दो आलीशान कोठियों का निर्माण कराया था, जिसमें तहखाने की तरह कक्ष बनाए गए थे। मुहिम को अंजाम देने के लिए प्रदेश के कट्टर नामी मौलाना से संपर्क भी साधा था। आने वाले दिनों में कोठी के 20 कक्षों में नियमित तकरीर कराने की तैयारी थी।
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जमालुद्दीन उर्फ छांगुर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छांगुर ने हिंदू श्रमिकों और गरीब परिवारों को पैसे का लालच देकर धर्म परिवर्तन करने की मुहिम का मजबूत जाल बुना था। शिजर- ए- तयब्बा किताब भी इसी उद्देश्य से लिखी गई थी, जिससे लोग आसानी से इस्लाम को समझ सकें और दुनिया के सबसे बड़े धर्म के रूप में मान सकें।
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नीतू उर्फ नसरीन
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अगली कड़ी में हिंदू देवी- देवताओं के प्रति कैसे घृणा भरी जाए और वेशभूषा कैसी हो, इसकी समझ को विकसित करने की तैयारी थी। मधपुर में कोठी का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, अभी निर्माण पूरी तरह हो नहीं सका था।
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बलरामपुर के मधपुर में स्थित छांगुर का मकान
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कोठी का निर्माण कराने वाले वसीउद्दीन ने बताया कि कोठी को अभी अलग नहीं कराया था। पिलर पर पूरी कोठी खड़ी की गई थी, जिससे छांगुर अपने हिसाब से कमरों में बांट सके। उन्होंने बताया कि निर्माण के समय ही उन्हें आभास हो गया था कि कुछ गलत कार्य के लिए ही कोठी बनाई जा रही है, लेकिन छांगुर ने उन्हें बताया था कि वह विद्यालय खोलना चाहता था।
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बलरामपुर के मधपुर उतरौला में ढहाया गया गेट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद कहा कि अस्पताल भी खोलेगा। इस तरह वह झूठ ही बोलता रहा। अब वह कोठी तो गिर गई है, लेकिन अब भी कुछ भाग शेष रह गया है। इस तरह छांगुर की योजना बड़ी घातक थी।