अमरोहा पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद घटनास्थल से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक चीख-पुकार मची रही। परिजन अपनों को पहचानने की मशक्कत करते दिखे। कोई घायलों में अपनों को तलाश रहा था तो कोई मृतकों में। घायलों और मृतकों के शरीर बुरी तरह झुलसने के कारण उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया। मृतकों में किसी का सिर तो किसी का हाथ धड़ से अलग हो गया। घायलों और मृतकों को देखकर हर कोई बदहवास हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद जब तक मृतकों के परिजन घटनास्थल पर पहुंचते तब तक मृतकों और घायलों को अस्पताल लाया जा चुका था।
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पोस्टमार्टम के बाद सौंपी गईं लाशें
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अपनों को देखकर अपने ही डरे
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजन अपनों को तलाशते रहे। कई परिजन मृतकों के पास पहुंचे तो उनमें उनके परिवार का कोई नहीं था। इसके बाद पुलिसकर्मियों के बताने पर वह जिला अस्पताल में भर्ती घायलों के पास पहुंचे। काफी देर तक जिला अस्पताल में अपनों को पहचानने का सिलसिला चलता रहा। आलम यह था कि मृतकों और घायलों को देखकर अपने भी डर रहे थे, क्योंकि कई का चेहरा बुरी तरह जला हुआ था। मृतक रूमा और सर्वेश का हाथ टूट गया था। मलबा गिरने के कारण मृतकों के शरीर पर चोटों के निशान भी थे। इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है।
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बिलखते परिजन
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एनसीआर के कारोबारी कर रहे व्यापार
दिल्ली-एनसीआर और हापुड़ के लोग अमरोहा जिले में बड़ी संख्या में कारोबार करते हैं। यही वजह है कि हापुड़ के रहने वाले मोहम्मद कामरान और सैफउर रहमान अतरासी क्षेत्र में पटाखा फैक्टरी चलाते थे। मोहम्मद कामरान की फैक्टरी में 14 जून 2024 को धमाका हुआ था, जबकि सैफउर रहमान की फैक्टरी में सोमवार को विस्फोट हो गया। जानकारों की मानें तो दिल्ली-एनसीआर के लोग यहां सस्ती जमीन और कम पैसों में मजदूर मिलने की चाह में कारोबार करते हैं। उन्हें ग्रामीण इलाकों में किराए पर सस्ती जमीन मिल जाती है, जबकि मजदूरों की भी कमी नहीं रहती। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर के मानक पूरा करना हर किसी कारोबारी के बस का नहीं है, जबकि अमरोहा जिले के ग्रामीण इलाकों में मानकों को पूरा करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से भी कारोबार चलाते रहते हैं।
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मृत महिलाएं
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पोस्टमार्टम के बाद देर रात घर पहुंचे मृतकों के शव
पटाखा फैक्टरी में जान गंवाने वाले चारों मृतक महिलाओं का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। डीएम निधि गुप्ता वत्स और एसपी के हस्तक्षेप के बाद देर शाम तक चारों शवों का पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद परिजन शवों को घर ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
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बेहोश हुई परिजन
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शवों के घर पहुंचते ही पसरा मातम
देर रात पोस्टमार्टम के बाद पहले रजबपुर निवासी शहनाज और रुखसाना के शव घर पहुंचे। रूमा और सर्वेश के शव बाद में पपसरा गांव पहुंचे। शवों के घर पहुंचते ही मातम पसर गया। चारों तरफ चीख पुकार मच गई। घटना के बाद दोनों ही गांव में चूल्हा नहीं जला। हर कोई गम में डूबा रहा। मृतक महिलाओं के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।