थरवई में हुए सामूहिक हत्याकांड में हत्यारों ने बर्बरता की सभी हदें पार कर दीं। हाल यह रहा कि ग्रामीण ही नहीं, जवान और पुलिस अफसर भी हैवानियत देख स्तब्ध थे। हत्यारों के सिर पर किस कदर खून सवार था, इसका पता इसी से चलता है कि एक साल की मासूम साक्षी पर भी उनका दिल नहीं पसीजा।
थरवई हत्याकांड : कातिलों ने कीं बर्बरता की हदें पार, मासूम बच्ची के भी सिर पर वार
उन्होंने सोते वक्त ही सिर पर वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया था। घटना के बाद मौके पर सबसे पहले पहुंचे पुलिसकर्मियों ने चारपाई पर मृत पड़ी मां के ठीक बगल में उसका शव पड़ा देखा तो उनका भी कलेजा मुंह को आ गया।
दूध बेचकर करता था परिवार का भरण पोषण
राजकुमार ने घर में ही भैंस व गाय पाल रखी है और दूध बेचकर वह अपने परिवार का पालन पोषण करता था। बताया जा रहा है कि भोर में 4.30 बजे के करीब गांव के ही कुछ लोग सामने से गुजरे तो घर से धुआं उठता देखा। सूचना पर जब थरवई पुलिस पहुंची तो मुख्य दरवाजा भीतर से बंद था। किसी तरह दरवाजा खोलकर पुलिसकर्मी भीतर पहुंचे तो एक चारपाई पर राजकुमार की बेटी की खून से लथपथ लाश दिखाई दी।
कुछ ही दूर पर दूसरी चारपाई पर राजकुमार व उसकी पत्नी कुसुम मृत पड़े थे। पुलिसकर्मियों की नजर मुख्य दरवाजे के बाएं तरफ स्थित टिनशेड के बरामदे में गईं तो वहां दंपती की बहू व एक साल की पौत्री खून से लथपथ मृत पड़े थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सभी को बड़ी बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया था। घटना में रॉड, डंडा और नुकीले हथियार का इस्तेमाल किया गया था।
जिंदा बची साक्षी के सिर पर भी चोट के निशान
मासूम साक्षी के माथे के साथ ही उसके सिर में चोट के निशान थे। ऐसे में आशंका है कि हत्यारों ने उसके सिर पर वार किया। साक्षी अपनी मां के साथ एक ही चारपाई पर सो रही थी और ठीक बगल में उसका शव पड़ा था। उसके सिर पर दाहिनी ओर गहरा जख्म था और माथे पर भी चोट के निशान थे। सिर से काफी खून भी बहा था, जिससे पूरा चेहरा खून से लथपथ हो गया था।
उधर दंपती की बेटी के सिर में गहरा जख्म होने के साथ ही उसकी आंख पर भी चोट के निशान थे। ऐसा लग रहा था कि सिर पर भारी चीज से वार करने के साथ उसकी आंख को नुकीले हथियार से गोदा गया था। राजकुमार व उसकी पत्नी कुसुम के सिर के साथ-साथ चेहरे पर भी जख्म था। चोट देखने से साफ था कि सिर पर भारी चीज से वार करने के साथ-साथ उनके चेहरे पर भी ताबड़तोड़ वार किए गए थे। दरिंदगी का यह आलम देख सभी स्तब्ध थे। उधर सुनील का रो-रोकर बुरा हाल था।
राख हो चुका था सामान
इससे पहले, जिस बरामदे में दंपती की बहू व मासूम साक्षी का शव मिला, इसी से ठीक सटे हुए कमरे से धुआं उठ रहा था। पुलिसकर्मियों ने खिड़की से झांककर देखा तो भीतर लपटें उठ रही थीं। सूचना दी गई तो फायरब्रिगेड पहुंची और कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। आग बुझने के बाद पुलिस अफसर भीतर पहुंचे तो देखा कि काफी सामान जल चुका था। सुनील ने बताया कि अलमारी व बक्सा खुला हुआ था, लेकिन सामान जल जाने के कारण यह नहीं पता चला कि घर से कोई सामान गायब है या नहीं। हालांकि उसने यह भी बताया कि घर में बहुत ज्यादा नकदी नहीं थी और पत्नी के गहने भी उसके मायके में रखे हुए थे।
मोबाइल को हाथ तक नहीं लगाया हत्यारों ने
सुनील ने बताया कि उसकी शादी सात साल पहले हुई थी। पत्नी मऊआइमा की रहने वाली थी। जीवन यापन के लिए उसने प्रयाग स्टेशन के पास गुमटी खोल ली थी। दुकान देर रात तक खुली रखने केलिए रोज घर आना संभव नहीं हो पाता था, ऐसे में वह दो-तीन दिन पर एक बार घर आता था। उसने बताया कि शुक्रवार शाम उसकी घरवालों से बात हुई थी और तब सब कुछ सामान्य था। बताया कि पिता के पास ही मोबाइल फोन था और इसी से वह पत्नी व बच्चों से बात करता था। खास बात यह कि हत्यारों ने राजकुमार के मोबाइल फोन को हाथ तक नहीं लगाया। जांच पड़ताल के दौरान यह घटनास्थल से ही बरामद हुआ जिस पर फोरेंसिक टीम ने उसे कब्जे में ले लिया।