अपने घरों से दूर मजदूरी की रोटी खाने वाले माटी के लालों को ककहरे के दो शब्द सीखने को मिला रहा है। इन्हें हिन्दी के ककहरे के साथ ही गणितीय अंक और अंग्रेजी की तामील दी जा रही है। इसके लिए पांच शिक्षकों को लगाया गया है। जो माह भर के लिए दूर-दराज से आए मजदूरों के बच्चों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
तंबुओं की नगरी में अस्थायी स्कूल, माटी के लाल सीख रहे ककहरा, तस्वीरें बयां कर रही कहानी
नागेंद्र पाल, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: shubham
Updated Tue, 19 Feb 2019 08:52 PM IST
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