मध्य प्रदेश में भारी बारिश और माताटीला व बरियारपुर बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के चलते शहर पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पिछले दो दिनों से गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इस बीच शुक्रवार सुबह नौ बजे माताटीला बांध से 4.14 लाख क्यूसेक और बरियारपुर बांध से 1.72 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ चौकियों पर राहत शिविरों के प्रबंध शुरू कर दिए हैं। वहीं, कछारी इलाकों दारागंज, सलोरी, बघाड़ा, बेली में पानी घुसने से खलबली मच गई है।
गंगा-यमुना में उफान, प्रयागराज शहर पर बाढ़ का खतरा
लगातार बारिश की वजह से ग्रामीण इलाकों में कई कच्चे मकान गिर गए। इसमें दबने से एक महिला की मौत हो गई। इसके अलावा कई परिवार बेघर हो गए हैं। उन्हें आशियाना तथा भोजन के लिए प्रशासन की मदद का इंतजार है। बीती रात हंडिया के औरा गांव में छप्पर और दलान गिरने से इनरावती देवी नामक महिला की मौत हो गई। साथ में तीन बच्चे भी सो रहे थे और बाल-बाल बच गए। राजेश की पत्नी इनरावती देवी तीन बच्चों मिथिलेश सात वर्ष, विपिन छह और एक वर्षीय देवेन्द्र के साथ छप्पर में सो रही थी।
बड़ा लड़का धीरज बगल के कमरे में था। पति भदोही स्थित गोशाला में काम करने गया था। रात्रि में छप्पर गिरने की आवाज आई तो आस-पास के लोग राजेश के घर पर जमा हुए। ग्रामीणों ने तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला लेकिन इनरावती दीवार से दबी थी। इसकी वजह से तत्काल नहीं निकाला जा सका। धीरे-धीरे गांव के अन्य लोग भी एकत्रित हो गए तथा इनरावती को निकाला गया लेकिन तब तक मौत हो चुकी थी। एसडीएम समेत अन्य अफसर मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मेजा के टुड़िहार गांव में निजाम अहमद का कच्चा घर ढह गया। उसमें सामान भी नष्ट हो गए। इसकी वजह से पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने के लिए विवश है। निजाम ने एसडीएम से मदद की मांग की है। मांडा के बरहाकला गांव में भी छविनाथ आदिवासी का कच्चा मकान गिर गया। गृहस्थी का सारा सामान भी उसमें दब गया।
प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए जिले में 102 मेडिकल टीमें तैनात की हैं। इनमें 23 शहर और 81 ग्रामीण क्षेत्रों में लगाई गई हैं। सभी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को आपदा प्रबंधन के लिए अलर्ट कर अतिरिक्त दवाएं मुहैया कराई गई हैं। सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी के मुताबिक जिलाधिकारी कार्यालय में तीन और उनके कार्यालय में दो विशेष टीमों को तैनात किया गया है। इनमें पालीवार डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को लगाया गया है। उन्होंने बताया कि सभी टीमों को ओआरएस, एंटी फंगल क्रीम, दर्द निवारक समेत अन्य दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जिला संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. एएन मिश्रा को प्रभावित इलाकों की रिपोर्ट लेकर टीम के साथ भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएमओ को एंटी लार्वा छिड़काव तेज कराने को कहा गया है।
खतरे के निशान की ओर बढ़ता गंगा-यमुना का जलस्तर शहरियों की चिंता का कारण बन गया है। कछारी इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। द्रौपदी घाट, छोटा बघाड़ा, बेली कछार, नेवादा में बाढ़ से घिरे दर्जनों घरों में पानी घुस गया। कछारी इलाकों में रहने वाली करीब दो लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में है। हर घंटे बढ़ रहे पानी से लोग दहशत में हैं। द्रौपदी घाट पर शाम 5.30 बजे गंगा का पानी देख रहीं गुड्डी खासी चिंतित थीं। वहां बाढ़ का पानी देखने को जुटे लोगों से बोलीं रात में पानी चढ़ा तो सामान समेटना पड़ेगा। ओम प्रकाश ने बताया कि नदी किनारे बने नौ घर बाढ़ के पानी से घिरे हैं। आदमी ही नहीं मवेशी भी फंसे हैं। लोगों ने सामान समेटकर दूसरी जगह ठिकाना बना लिया है। वहीं घाट किनारे बस्ती में रहने वाले एहतियातन सामान समेटने की तैयारी दिखे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बाढ़ का पानी मौजसरैयां कब्रिस्तान तक पहुंचा तो समझिए खतरा बढ़ा है। बातचीत में मालूम चला कि रात भर जागकर लोग बारी-बारी से बढ़ते पानी को देखने का काम कर रहे हैं। आशंका जताई कि नदी का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो घाट किनारे बस्ती के हर घर में बाढ़ का पानी पहुंच जाएगा। घाट किनारे ही लोग हनुमान मंदिर में स्थापित मूर्ति के डूबने को बाढ़ का खतरा बिंदु मानते हैं, जो दो मीटर जलस्तर और बढ़ने के बाद ही संभव हो पाएगा।