इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) का नाम बदलकर ‘प्रयागराज विश्वविद्यालय’ किए जाने की तैयारी हो गई है। इस प्रस्ताव को कार्य परिषद के एजेंडे में शामिल कर लिया गया है और अगली बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगाए जाने की उम्मीद है। हालांकि कुछ छात्र संगठनों ने अभी से इसका विरोध शुरू कर दिया है।
इलाहाबाद विवि का नाम ‘प्रयागराज विश्वविद्यालय’ करने की तैयारी
इससे पूर्व मुख्य सचिव की ओर से भी अक्तूबर 2018 में इविवि प्रशासन को इस संबंध में पत्र जारी किया गया था और 10 फरवरी 2020 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के अनु सचिव राजू सारस्वत की ओर से भी पत्र जारी कर दिया गया।
इविवि प्रशासन ने इन तमाम पत्रों को संज्ञान में लेते हुए इविवि का नाम बदलकर ‘प्रयागराज विश्वविद्यालय’ किए जाने से संबंधित प्रस्ताव को कार्य परिषद के एजेंडे में शामिल कर लिया है। इस मुद्दे पर 16 मार्च को निर्णय लिया जाना था लेकिन इविवि प्रशासन ने कोरोना वायरस के मद्देनजर 16 को प्रस्तावित कार्य परिषद की बैठक स्थगित कर दी थी। प्रस्ताव एजेंडे में शामिल हो चुका है। ऐसे में कार्य परिषद की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर निर्णय ले लिया जाएगा।
नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध, फूंका पुतला
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम बदले जाने के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को इसके विरोध में छात्रों ने छात्रसंघ भवन पर कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी का पुतला फूंका। छात्रों ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय का सवा सौ साल से पुराना इतिहास है और यह अपने नाम में ही तमाम स्वर्णिम इतिहास समेटे हुए है।
विश्वविद्यालय का नाम ही उसकी धरोहर है और इससे छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जागी। छात्रों ने प्रस्ताव की निंदा की। इस मौके पर छात्र नेता अजय यादव सम्राट, सत्यम कुशवाहा, मसूद अंसारी, आदित्य कुमार, गोलू पासवान, मोहम्मद जैद, सचिन, कुंवर विकास यादव, सरवन, अश्वनी, विजय कांत, हरीश, शकील आदि मौजूद रहे।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने विरोध में सांसद को लिखा पत्र
इविवि छात्रसंघा की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने सांसद विनोद सोनकर को पत्र लिखकर इविवि का नाम बदले जाने के प्रस्ताव पर अपना विरोध दर्ज कराया है। ऋचा ने पत्र के माध्यम से कहा है कि इविवि का 132 साल पुराना गौरवशाली इतिहास रहा है। यह नाममात्र संज्ञा नहीं है, बल्कि विशेषणों का समूह है।ऋचा का कहना है कि इसका नाम बदलने से लाखों पुरा छात्रों की डिग्र्ी पर संकट आ सकता है और एक बड़ी पहचान भी संकट में पड़ जाएगी। ऋचा ने मांग की है कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने का विचार तत्काल त्याग दें। यह किसी के पुत्रा या पुत्री का नाम नहीं है, जो जब चाहे बदल दिया जाए, यद्यपि हाईस्कूल के बाद वह भी नही बदला जा सकता है।