स्नान घाटों समेत आरती स्थलों के डूबने के बाद शुक्रवार की शाम गंगा-यमुना के तटवर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया। कछारी इलाके बाढ़ के पानी से घिरने लगे हैं। गंगा बड़े हनुमान के द्वार तक पहुंच गईं। इसी के साथ कछारी इलाके की बस्तियों से लोग गृहस्थी समेट कर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। नगवासुकि से पचासों परिवारों ने परेड में शरण ले ली।
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उधर, हरिद्वार, नरोरा और कानपुर बांधों से शुक्रवार को भी गंगा में 4.39 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। पानी बढ़ने से गंगा आरती अब ऊपर होने लगी है। जलस्तर तेजी से बढ़ने की वजह से शाम तक संगम क्षेत्र पूरी तरह खाली कर दिया गया। तीर्थ पुरोहितों की चौकियां बेनी बांध, हनुमान मंदिर मार्ग, त्रिवेणी मार्ग के अलावा परेड मैदान में देर रात तक लगाई जाती रहीं।
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वीआईपी घाट, रामघाट, दशाश्वमेध घाट पूरी तरह डूब गया। शाम को किला के सामने नावें चलने लगी। अलावा नागवासुकी व बेनी बांध के आसपास रहने वाले सैकड़ों गरीबों ने सामान समेट कर परेड में अपना ठिकाना बना लिया। वहीं बांधों से भी लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।
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सिंचाई बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम के मुताबिक शुक्रवार की शाम छह बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 80.12 मीटर और छतनाग में 79.07 मीटर रिकार्ड किया गया। नैनी में यमुना का जल स्तर 79.67 मीटर रिकार्ड किया गया। उधर, बांधों से भी गंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।
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शुक्रवार को हरिद्वार से 74,782 हजार क्यूसेक, नरोरा से 90,858 क्यूसेक और कानपुर से 2.73 लाख, 981 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इसी के साथ कछारी बस्तियों की ओर जल दबाव बढ़ने लगा है।