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मोरारी बापू के कथा पंडाल में निकाह भी कबूल हुआ और सात फेरे भी लिए गए, मानस पोथी बनी साक्षी

Sun, 08 Mar 2020 01:52 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 08 Mar 2020 01:52 AM IST
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pandal of Morari Bapu, Manas Pothi is seen as a witness on Vyas Peetha, marriage and marriage
prayagraj news - फोटो : prayagraj

संत मोरारी बापू की व्यास पीठ पर शनिवार को निकाह भी कबूल हुआ और सात फेरे भी लिए गए। उन्नाव के जामा मस्जिद एबी नगर निवासी इमरान अंसारी और इसी शहर की नूर बानो ने रामकथा के पंडाल में व्यासपीठ के सामने रामचरित मानस की पोथी को साक्षी मान कर निकाह कबूल किया। इस पीठ से एक सेक्स वर्कर की पुत्री के भी हाथ पीले हुए। इनके समेत कुल 95 बेटियों की शादी एक साथ इस मंडप में रचाई गई।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj

संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से दुल्हनों को लहंगा-चुन्नी और दूल्हों को शेरवानी, सेहरा में सजाया गया। रामकथा के विश्राम के दौरान एक साथ जब वर-वधुओं के जोड़े व्यास पीठ के सात फेरे लेकर एक-दूजे के हुए तो एक साथ हजारों कथा प्रेमियों ने दोनों हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया। बेटियों को उपहार स्वरूप गृहस्थी व अन्य खर्चे के लिए 75-75 हजार रुपये भी दिए गए। घरातियों, बारातियों की खूब खातिरदारी भी हुई। कैलाश, संगम और प्रयाग प्रभु प्रसाद पंडाल में बारातियों केलिए अलग से भोजन के काउंटर लगाए गए थे। बापू ने हिंदू जोड़ों को आशीर्वाद और मुस्लिम जोड़े को मुबारकबाद दी।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj
सामूहिक विवाह के मौके पर बधाई बजी तो बजती रही। लोग पंडाल से लेकर 11लाख स्क्वायर फीट एरिया में बने कथा स्थल परिसर में जगह-जगह लगे एलईडी स्क्रीन पर उन क्षणों को निहारने के लिए आतुर थे। मोरारी बापू ने कथा के दौरान ही राम विवाह के प्रसंग पर प्रेम और समर्पण की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि इस पंडाल में कुछ देर बाद 95 बेटियों की शादी होने वाली है, ऐसे में सामूहिक रूप से मंगल गीत-नृत्य होना चाहिए। फिर क्या था? गरबा रास शुरू हो गया। बापू खुद गरबा गा रहे थे और पूरा पंडाल गरबा महारास पर झूम-थिरक रहा था। 
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