दुनिया का दम निकालने वाले कोरोना संकट के दौरान ऑनलाइन कंपनियों की पौ बारह हो गई है। कोरोना की दूसरी लहर के बीच तमाम बंदिशों की वजह से प्रयागराज में ज्यादातर ग्राहकों का रुझान ऑनलाइन खरीदारी की ओर बढ़ा। इस दौरान ई कामर्स कंपनियों के माध्यम से लोगों ने राशन, दवाईयां आदि की भी अच्छी खरीदारी की। अमूमन ऑनलाइन कंपनियों से राशन, दवा आदि लोग कम ही खरीदते हैं, लेकिन बीते एक माह के दौरान लोगों ने इस प्लेटफार्म का प्रयोग पहले की तुलना में ज्यादा किया। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रयागराज में बीते एक माह के दौरान सिर्फ ऑन लाइन कंपनियों द्वारा 30 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर लिया गया।
कोरोना काल में ऑनलाइन कंपनियों की तरफ बढ़ा रुझान, तीस करोड़ का हुआ कारोबार
- प्रयागराज में ऑनलाइन कंपनियों द्वारा राशन, दवाई समेत तमाम प्रोडक्ट से एक माह में ही किया 30 करोड़ से ज्यादा का कारोबार
ऑन लाइन कंपनियों के माध्यम से सात से आठ करोड़ का खरीदा गया राशन
15 अप्रैल से 15 मई तक के दौरान प्रयागराज में कोरोना कर्फ्यू की वजह से बने कंटेनमेंट जोन के चलते लोगों ने ऑनलाइन कंपनियों द्वारा राशन खरीदने को तरजीह दी। इस दौरान कुछ स्थानीय कंपनियों ने भी लोगों को होम डिलीवरी मुहैया करवाई। हालांकि इन कंपनियों की शर्त रही कि न्यूनतम एक हजार की खरीद पर ही वह राशन घर पहुंचाएंगे। एक कंपनी से जुड़े अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि लॉकडाउन के पूर्व गिनती भर लोग ही राशन मंगाते थे, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के दौरान एक-एक डिलीवरी ब्वॉय के पास दो दर्जन से ज्यादा आर्डर मिलने लगे। बड़ी ई कामर्स कंपनियों द्वारा भी राशन की डिलीवरी की गई। माह भर में ही प्रयागराज में सात से आठ करोड़ रुपये में ऑनलाइन कपंनियों द्वारा राशन की डिलीवरी की गई।
तेजी से बढ़ा ई-फार्मेसी का बिजनेस
देश में कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही ई-फॉर्मेसी से खरीदारी में भी तेजी आई है। प्रयागराज की ही बात करें तो ऑनलाइन फार्मेसी चलाने वाली कंपनियों का बिजनेस यहां 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इन कंपनियों के माध्यम से लोग दवा, हेल्थ सप्लिमेंट्स, मेडिकल डिवाइसेज और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) की अधिक खरीदारी कर रहे हैं। प्रयाग केमिस्ट एसोसिएशन के लालू मित्तल बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों के लगातार बढ़ने के कारण से काफी लोगों ने केमिस्ट की दुकानों पर जाने के बजाय ऑनलाइन दवाएं और मेडिकल आइटम मंगवाया। इससे स्थानीय दुकानदारों को काफी नुकसान हुआ।
कम मरीज मिलने से फूड डिलीवरी कंपनियों के बढ़े आर्डर
कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए लगे कर्फ्यू की शुरूआत में फूड डिलीवरी कंपनियों से लोगों ने खाने पीने का सामान आदि मंगवाना तकरीबन बंद कर दिया था, लेकिन अब कोरोना के गिर रहे ग्राफ की वजह से लोगों ने एक बार फिर से फूड डिलीवरी प्लेटफार्म जोमैटो, स्विगी आदि के जरिए से सामान मंगवाना शुरू कर दिया है। इन कंपनियों ने भी कूरियर्स, कुक तथा उनसे जुड़े हर सदस्य के लिए तापमान जांच आरंभ कर दी है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि स्टॉफ जब काम पर आयें तो वे पूरी तरह स्वस्थ हो। साथ ही ये कंपनियां ग्राहकों तक स्टॉफ की मेडिकल हिस्ट्री भी दे रही है ताकि ग्राहक में फूड क्वालिटी को लेकर भरोसा कायम रहें। एक डिलीवरी ब्वॉय रमेश यादव ने बताया कि कुछ रेस्टोरेंट, बेकरी और मिठाई की दुकानों ने ऑनलाइन आर्डर लेने शुरू किए हैं। हालांकि अभी पहले के मुकाबले में आर्डर 40 से 50 फीसदी ही मिल रहा है।
मोबाइल, कंप्यूटर की भी खूब हुई ऑनलाइन डिलीवरी
कोरोना कर्फ्यू के दौरान बीते एक माह के दौरान जिले में इलेक्ट्रानिक उत्पादों की दुकानें भले ही बंद रही हो लेकिन इस अवधि में ऑन लाइन कंपनियों द्वारा मोबाइल, लैपटॉप एवं अन्य इलेक्ट्रानिक उत्पादों की लोगों को होम डिलीवरी की गई है। इसका आल इंडिया रिटेल मोबाइल एसोसिएशन की ओर से विरोध भी किया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारी विपिन गुप्ता ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान ऑन लाइन कंपनियों द्वारा डिलीवरी की गई। इस संबंध में डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा के समक्ष एसोसिएशन की तरफ से आपत्ति दर्ज की गई। फिलहाल कोरोना कर्फ्यू के पूर्व प्रयागराज में मोबाइल, कंप्यूटर एवं अन्य इलेक्ट्रानिक उत्पाद का एक करोड़ तक का कारोबार था जो बढ़कर दो से ढाई करोड़ रुपये माह हो गया।ई कामर्स कंपनियों द्वारा लगातार रिटेल कारोबारियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कोरोना कॉल में रिटेल कारोबारियों ने जहां सरकार के सभी नियम कानून का पालन किया तो वहीं ई कामर्स कंपनियों द्वारा इस अवधि में जमकर मनमानी की गई। कोविड प्रोटोकाल का पालन किए बगैर तमाम प्रोडक्ट की होम डिलीवरी की गई। एक माह में 30 करोड़ से ज्यादा का कारोबार ई-कामर्स कंपनियों ने किया। - महेंद्र गोयल, प्रदेश अध्यक्ष कैट।